डांडी को पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील घोषित करने का निर्णय
यह कार्य पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के गांधीवादी सिद्घांतों पर आधारित होगा। परियोजना के प्रमुख घटकों में तट और तटीय संसाधनों का संरक्षण, संसाधनों को प्रति के आधार पर विकसित करना, गांवों और समुदायों के एकीत विकास को प्रोत्साहन देना और डांडी को परिस्थितिकीय पर्यटन के रूप में पेश करना शामिल हैं।
डांडी गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित है। यह नवसारी जिले का एक छोटा सा गांव है। यहीं 1930 में महात्मा गांधी ने ऐतिहासिक नमक आंदोलन की शुरुआत की थी।
परियोजना के तहत गैर पारंपरिक ऊर्जा को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी और प्राकृतिक रूप से विकास के गांधीवादी सिद्धांतों को अपनाने से पारिस्थितकी का संरक्षण होगा। सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को कायम किया जाएगा।
इसके अलावा जल स्रोतों को बचाने, अपशिष्ट प्रबंधन, कार्बन रहित ग्राम परियोजना, आजीविका बढ़ाने की गतिविधियां, ग्रामीण विकास आदि भी इस परियोजना के अंग हैं। डांडी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसका आधार पर्यावरण संरक्षण होगा।
यह परियोजना पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की है और इसका कार्यान्वयन एकीत तटीय क्षेत्र प्रबंधन समाज (साइकॉम) ग्राम पंचायतों और गुजरात पारिस्थितिकी आयोग के सहयोग से करेगा। इसमें अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ और देश के अन्य गांधीवादी अध्ययन केंद्र भी अपना योगदान करेंगे। परियोजना को विश्व बैंक वित्तीय सहायता देगा।
परियोजना पर शुरुआती लागत 25 करोड़ रुपये आने का अनुमान है और इसे दो वर्षो में पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना द्वारा सृजित परिसंपत्तियों के रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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