जाँच के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

इन लोगों की माँग है कि श्रीलंका सरकार के ख़िलाफ़ लगाए गए युद्ध-अपराध के आरोपों की जाँच बंद की जाए. ये लोग संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर के बाहर जमा हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी माँग नहीं मानी जाएगी वे वहाँ से नहीं हटेंगे.
श्रीलंका में सरकारी सैनिकों और तमिल विद्रोहियों के बीच हुई लड़ाई में कथित ज्यादतियों की जाँच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने मानवाधिकार विशेषज्ञों की एक समिति गठित की है.
विरोध प्रदर्शन करने वालों ने बान की मून का पुतला जलाया और संयुक्त राष्ट्र की नीतियों के ख़िलाफ़ नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व श्रीलंका के आवास मंत्री विमल वीरवंशा कर रहे थे और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय के घेराव का आह्वान किया था.
श्रीलंका की सरकार इस जाँच अनावश्यक बता रही है और उसका कहना है कि उसके सैनिकों ने आम नागरिकों के ख़िलाफ़ कोई अत्याचार नहीं किया है. निष्पक्ष सूत्रों का कहना है कि श्रीलंका की सरकार ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया जबकि तमिल विद्रोहियों ने आम नागरिकों को जबरन ढाल की तरह इस्तेमाल किया.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस लड़ाई के अंतिम पाँच महीनों में लगभग सात हज़ार आम नागरिक मारे गए. बताया गया है कि जाँच के लिए जो समिति गठित की गई है वह महासचिव को सुझाव देगी कि युद्ध-अपराध के दोषियों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की जाए.
घटनास्थल पर मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रदर्शनकारी काफ़ी गुस्से में हैं और उनका कहना है कि ये प्रदर्शन तब तक जारी रहेंगे जब तक कि संयुक्त राष्ट्र जाँच समिति को भंग नहीं कर देता.
मई 2009 में ख़त्म हुई लड़ाई के बाद वहाँ मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर दुनिया भर में चिंता प्रकट की जा रही है, श्रीलंका की सरकार कह रही है कि वह अपने स्तर पर आरोपों की जाँच कराएगी लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसी कोई जाँच निष्पक्ष नहीं होगी.












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