विदेशी शिक्षा विधेयक की वित्तीय अनिवार्यता बाधा : यूएसआईबीसी
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को लिखे एक पत्र में इस व्यापार संगठन ने कहा कि भारत में उच्च शिक्षा तंत्र की शुरुआत के लिए यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अगले 10 साल में उच्च शिक्षा प्रणाली में कुल छात्रों के 30 प्रतिशत को शामिल करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने हालांकि कहा, "हमें लगता है कि इस विधेयक के कुछ प्रावधान विदेशी शिक्षण संस्थानों को भारत में निवेश करने से रोक सकते हैं। प्रस्तावित वित्तीय जरूरतों के कारण संस्थान भारत में साझेदारी करने से निरुत्साहित हो सकते हैं।"
परिषद के अध्यक्ष रॉन सोमर्स ने पत्र में लिखा, "यह विधेयक दोनों देशों के बीच ज्ञान के विस्तार में मदद करेगा साथ ही इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।"
सोमर ने कहा, "कई महाविद्यालय और विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए तैयार हैं लेकिन यह जरूरी है कि उन्हें कुछ प्रोत्साहन दिया जाए।"
उन्होंने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक मुक्त बाजार अर्थव्यवस्थाओं भारत और अमेरिका के नेता दुनिया में विकास, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि 21वीं सदी में अपनी अगली पीढ़ी को कुशल और शिक्षित बनाने के लिए दोनों देशों को सक्षम होने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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