बिछड़े भाई की वापसी से छोटा भाई खुश, पर कश्मकश में
कुशीनगर जिले के लक्ष्मीपुर पड़रावां गांव निवासी राजेश्वर गौतम (29) ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "मैं खुशी मनाऊं या अपने भाई की पत्नी से शादी करने के लिए खुद को कोसूं..मैं बहुत अपराधग्रस्त महसूस कर रहा हूं.. समझ में नहीं आ रहा है कि बड़े भैया का सामना हम कैसे करेंगे।"
गौतम के मुताबिक उन्होंने फूल कुमारी से शादी अपने परिवार और रिश्तेदारों के बहुत दबाव के बाद किया। दरअसल, परिवार को शंभू के मिलने के सारी उम्मीदें खत्म हो गई थीं।
गौतम कहते हैं, "हमने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन वर्षो तक शंभू की कोई खबर न मिलने के बाद हमने सोचा कि वह अब जिंदा नहीं हैं। करीब डेढ़ साल पहले हमने शादी कर ली।"
शंभू के चार भाइयों में गौतम सबसे बड़ा था।
गौतम से फूल कुमारी को चार माह का एक बेटा और शंभू से छह साल की बेटी है।
फूल कुमारी कहती है "गौतम हमारा बहुत ख्याल रखते हैं। खासकर बेटी माया जो पहले पति से हुई थी, उसे बहुत स्नेह देते हैं। अब मुझे आगे का रास्ता नहीं सूझ रहा है। मैंने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है।"
परिजनों के मुताबिक शंभू दिमागी रूप से बीमार था और 2005 से लापता था।
गौतम ने बताया कि शंभू को फूल कुमारी से शादी के करीब दो साल पहले ही 2002 में कुछ मानसिक दिक्कतें शुरू हुई थीं। कई चिकित्सकों से इलाज के बावजूद उसकी हालत में खास सुधार नहीं हुआ। परिवार के लोग उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते थे, लेकिन एक दिन वह घर से निकलने में कामयाब हो गए और फिर लापता हो गए।
स्थानीय अभिसूचना इकाई के कुछ अधिकारियों ने गौतम के परिजनों को कुछ महीने पहले सूचना दी कि शंभू पाकिस्तान की लाहौर सेंट्रल जेल में बंद है।
कुछ दिन पहले पुलिस ने गौतम को सूचित किया कि 23 जून को पाकिस्तान सरकार ने बाघा सीमा पर शंभू को रिहा कर दिया है और वह फिलहाल अमृतसर के इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती है।
गौतम के मुताबिक शंभू से मिलने के लिए कुछ परिजन और रिश्तेदार अमृतसर के लिए रवाना हो चुके हैं। गांव वाले भी शंभू को वापस लाने में मदद दे हैं। परिजनों को उम्मीद है कि शंभू अगले चार-पांच दिनों में घर लौट आएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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