डीजल की कीमतें भी नियंत्रणमुक्त होंगी : प्रधानमंत्री (राउंडअप)
अरविंद पद्मनाभन
एयर इंडिया वन से , 29 जून (आईएएनएस)। अत्यधिक लोकलुभावनी नीतियों के खतरों के प्रति जनता को अगाह करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि पेट्रोल की तरह डीजल की कीमतों को भी नियंत्रणमुक्त किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने विदेशों से आने वाली पूंजी पर कर लगाने से इंकार करते हुए कहा है कि अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है।
टोरंटो में जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेकर नई दिल्ली लौटते समय उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "पेट्रोलियम पदार्थो पर सब्सिडी ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जो देश के मजबूत वित्तीय प्रबंधन के अनुकूल नहीं है।"
शनिवार को मंत्रियों के एक अधिकार प्राप्त समूह द्वारा लिए गए फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "पेट्रोल की कीमतों के नियंत्रणमुक्त होने की तरह ही डीजल की कीमतों पर से नियंत्रण हटाने की जरूरत है।"
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडलीय समूह ने सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल की कीमतें तय करने का अधिकार दे दिया है जबकि डीजल की कीमतों में दो रुपये या उससे अधिक की वृद्धि के लिए तेल मंत्रालय की अनुमति की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थो पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी को देखते हुए केरोसीन और रसोई गैस सहित इन पदार्थो की कीमतों का समायोजन आवश्यक था।
उन्होंने कहा, "परंतु हमने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि समाज के गरीब तबके के लोग इससे सबसे कम प्रभावित हों। इसलिए केरोसीन और रसोई गैस की कीमतों को नियंत्रण में रखा गया है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस बारे में केवल विपक्षी पार्टियों के रुख को पढ़ा है लेकिन उनका मानना है इस फैसले के पीछे सरकार की मजबूरी को लोग समझेंगे।
उन्होंने कहा, "हमारे लोग यह समझने के लिए पर्याप्त बुद्धिमान हैं कि देश के विकास को रोकने के लिए अत्यधिक लोकलुभावनी नीतियों की अनुमति नहीं होनी चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका समर्थन हुआ है।"
बाहरी पूंजी की आवक पर कर नहीं :- प्रधानमंत्री ने एक सवाल पर कहा, "मैं सोचता हूं कि देश में बाहरी पूंजी की आवक दोनों रूपों (प्रत्यक्ष निवेश और संस्थागत निवेश) में उचित स्तर पर है।"
विदेशी पूंजी की आवक पर लगने वाले कर को 'टोबिन कर' कहा जाता है। इसका नामकरण नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जेम्स टोबिन के नाम पर किया गया है। इस तरह का कर उस स्थिति में लगाया जाता है जब सरकार महसूस करती है कि विदेशी पूंजी के कारण घरेलू वित्तीय तंत्र पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "विशेष स्थिति में टोबिन टैक्स लगाया जाता है, जहां तक भारत की बात है तो हम उस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं जहां पूंजी का प्रवाह एक समस्या बन गई हो।"
उन्होंने कहा, "हमारे यहां ऐसी स्थिति नहीं है जिससे टोबिन कर लगाने की जरूरत पड़े।"
ब्राजील ने अपने यहां दो फीसदी टोबिन कर लगा रखा है। इस बारे में जी-20 की बैठक और भारतीय रिजर्व बैंक स्तर पर चर्चाएं हो रही हैं।
पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने ऐसे किसी भी विधेयक से इंकार किया जिसके तहत कारपोरेट घरानों को सामाजिक सेवा मुहैया कराने के लिए बाध्य किया जा सके।
जी-8 सुरक्षा के लिए, जी-20 अर्थव्यवस्था के लिए :- प्रधानमंत्री ने कहा कि जी-20 को आर्थिक मामलों पर दुनिया का मुख्य मंच बनाने का विचार है जबकि जी-8 सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
उन्होंने कहा, "जहां तक जी-20 का विचार है, इस पर सहमति है कि यह अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर चर्चा का प्राथमिक मंच होगा। मैंने कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर से बात की। उन्होंने कहा कि संभवत: जी-8 पहले की अपेक्षा सुरक्षा मामलों से और अधिक उत्साह के साथ निपटेगा।"
इसका मतलब हुआ कि अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मामलों में भारत को व्यापक ताकत मिलेगी जो जी-20 का एक महत्वपूर्ण घटक है। इस समूह में ईयू के अलावा दुनिया के सर्वाधिक औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्था वाले 19 देश शामिल हैं।
टोरंटो के जी-20 शिखर सम्मेलन की उपलब्धि काफी कम होने के दृष्टिकोण पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ मामलों में यह सम्मेलन नवंबर में सियोल में होने वाले अगले सम्मेलन की तैयारी था।
उन्होंने कहा, "मेरे विचार से सम्मेलन में सियोल में होने वाले सम्मेलन के लिए कार्यसूची और कार्य योजना तैयार करने में मदद मिली। फिर भी वहां इस पर बात पर सहमति थी कि सुधार की स्थिति अभी कमजोर है।"
उन्होंने कहा कि सभी पर एक ही तरह कार्रवाई का दबाव डालने की बजाय राजकोषीय मजबूती के लिए सतर्क प्रयास करने की आवश्यकता है। जो भी देश राजकोषीय मजबूती के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको विकास प्रभावित नहीं होने देने के उपाय करने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय देशों ने राजकोषीय मजबूती के लक्ष्य रखें हैं लेकिन उनको अपना कार्य सावधानी से करने पर जोर देना चाहिए।
ओबामा के दौरे केलिए तैयारी बैठक जुलाई में :- अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहली भारत यात्रा की तैयारियों को शुरू करने के लिए वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेम्स एल. जोंस अगले महीने भारत के दौरे पर आएंगे।
उन्होंने बताया, "वह अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को जुलाई के दूसरे हफ्ते में भेजेंगे। वह हमारे सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से मिलेंगे। वे राष्ट्रपति ओबामा की यात्रा का एजेंडा निर्धारित करेंगे।"
पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर अति आशावादी न हों : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर अति आशावादी न होने का संकेत देते हुए कहा कि यह वक्त बताएगा कि शांति वार्ता का क्या रुख होता है।
पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक के बीच हुई मुलाकात के संदर्भ ने प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले सप्ताह गृह मंत्री पाकिस्तान में थे। मैं मानता हूं कि कुछ उम्मीद (पाकिस्तान के साथ वार्ता को लेकर) जरूर है।"
उन्होंने कहा, "मैं पहले भी कह चुका हूं कि पाकिस्तान को लेकर हमारा रवैया यकीन करने का होना चहिए। विश्वास के साथ ही इसका आकलन भी होना चाहिए। ऐसे में वक्त बताएगा कि पाकिस्तान क्या रुख अपनाता है।"
भोपाल गैस त्रासदी के बारे में सरकार ने कुछ नहीं छिपाया :- प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा भोपाल गैस त्रासदी के बारे में कुछ भी छिपाने से इंकार करते हुए उम्मीद जताई कि अमेरिका यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन अध्यक्ष वारेन एंडरसन का प्रत्यर्पण करेगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या एंडरसन के प्रत्यर्पण की मांग की जाएगी, प्रधानमंत्री ने कहा, "हम अपने रुख पर कायम हैं। हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि अमेरिकी सरकार प्रत्यर्पण पर और सकारात्मक रुख दिखाए।"
उन्होंने कहा, "लेकिन हमने उनसे अभी संपर्क नहीं किया है। मैंने राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ चर्चा में इस मुद्दे को नहीं उठाया।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "सच्चाई क्या है? हम कुछ भी नहीं छिपा रहे। मेरे विचार से मंत्रियों के समूह ने रिकार्डो को देखा है। ऐसा फैसला किसने लिया, इस बारे में मंत्री समूह ने सभी तथ्यों को देखा और उसे कुछ नहीं हासिल हुआ।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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