दूसरों के जीवन में झांकने की ख्वाहिश और रियलिटी शो
मधुश्री चटर्जी
नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। टेलीविजन पर रियलिटी शो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और इसका श्रेय दूसरों के जीवन में झांकने की लोगों की प्रवृत्ति को जाता है। हाल ही में 'बुद्ध बक्से' (टेलीविजन) पर एक किताब लिख चुके एमटीवी के पूर्व प्रस्तोता ओंकार सेन ने यह बात कही है।
सेन कहते हैं, "दूसरों के जीवन में झांकने की प्रवृत्ति के चलते टेलीविजन सामग्री में गिरावट आ रही है और पिछले तीन साल के अंदर रियलिटी शो की संख्या बढ़ी है।" हाल ही में सेन की किताब 'कमिंग सून द एंड: द रियलिटी शो कॉल्ड टेलीविजन' प्रकाशित हुई है।
पच्चीस वर्षीय सेन ने आईएएनएस से कहा, "हर किसी की यह जानने में बहुत दिलचस्पी है कि दूसरों के जीवन में क्या चल रहा है। यदि कोई दुर्घटना होती है तो 30 लोग दुर्घटना स्थल पर जमा हो जाते हैं और यह जानना चाहते हैं कि वहां क्या चल रहा है।"
सेन मानते हैं कि भारत में पश्चिम को देखकर रियलिटी शो का चलन शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि यह कुछ ऐसा ही है कि 'पश्चिम छींकता है और भारत को सर्दी हो जाती है'। 'अमेरिकन आइडल' की तर्ज पर भारत में 'इंडियन आइडल' शुरू हुआ और अब वी चैनल 'फ्रैंड्स' का भारतीय संस्करण 'रूमीज' प्रसारित करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि जब वह एमटीवी से जुड़े थे तब वह एक संगीत चैनल था लेकिन उनके उससे अलग होने तक वह रियलिटी कार्यक्रमों का चैनल बन गया था।
सेन की किताब समसामयिक टेलीविजन की आंतरिक तौर पर और दर्शकों के मनोविज्ञान के आधार पर समीक्षा करती है।
सेन कहते हैं कि टेलीविजन पर संगीत, बच्चों, समाचारों और सामान्य मनोरंजन की मौजूदगी हमेशा बनी रहेगी लेकिन अन्य कार्यक्रमों के अस्तित्व को लेकर अनिश्चितता रहेगी। वह कहते हैं कि धारावाहिकों का बार-बार प्रसारण रुकना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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