कनिष्क विस्फोट पर कनाडा ने कहा 'सॉरी' (लीड-1)
टोरंटो, 24 जून (आईएएनएस)। एयर इंडिया के कनिष्क विमान में 1985 में हुए विस्फोट के 25 साल पूरे होने के मौके पर बुधवार को पहली बार कनाडा की सरकार ने औपचारिक रूप से इस घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ितों से क्षमा मांगी।
प्रधानमत्री स्टीफन हार्पर भी टोरंटो के हमबर बे पार्क में आयोजित होने वाली एक स्मृति सभा में पहुंचे। इसी मौके पर हार्पर ने कहा, "हम खेद हैं। आपका दर्द हमारा दर्द है। आपका दुख हम सभी का दुख है।"
उन्होंने कहा, "यह विदेशी लोगों की करतूत नहीं थी। इस जघन्य अपराध की साजिश कनाडा में रची गई, इसको अंजाम देने वाले कनाडाई नागरिक थे और इसके शिकार होने वाले भी हमारे ही देश के लोग थे।"
हार्पर ने कहा, "यह कायर लोगों की ओर से किया गया अपराध था। यह नहीं होना चाहिए था। इसे किसी भी सूरत में नहीं होने देना चाहिए था। मैं आप लोगों से कनाडा सरकार की विफलता और व्यवहार के लिए क्षमा मांगता हूं।"
पिछले दिनों पूर्व प्रधान न्यायधीश जॉन मेजर की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें कनाडाई सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया है।
पीड़ित परिवारों की दबाव की वजह से कनाडाई सरकार ने मेजर की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। चार वर्ष तक चली जांच के दौरान आयोग ने पीड़ित परिवारों से बात करने के साथ जन सुनवाई करने के अलावा 200 से अधिक गवाहों के बयान लिए।
23 जून, 1985 को मांट्रियल से दिल्ली के लिए उड़े कनिष्क विमान को विस्फोट से उड़ा दिया गया था। विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। उसी दिन टोक्यो हवाई अड्डे पर भी विस्फोट हुआ था जिसमें दो लोग मारे गए थे।
इस घटना के बाद बाल गुप्ता ने 'एयर इंडिया पीड़ित परिवार संघ' नामक एक संगठन का गठन किया था। इस विस्फोट में गुप्ता ने अपनी पत्नी को खो दिया था। रिपोर्ट जारी होने के तत्काल बाद उन्होंने प्रधानमंत्री हार्पर से मुलाकात की थी।
इस स्मृति समारोह में गुप्ता ने हार्पर का आभार प्रकट करते हुए कहा, "विमान में 80 बच्चे थे जिनकी उम्र 12 साल से भी कम थी। 29 परिवार पूरी तरह से खत्म हो गए। 32 लोग तन्हा बच गए। छह दंपतियों ने अपने बच्चे खो दिए। दो बच्चों ने अपने मा-बाप खो दिए।"
उल्लेखनीय है कि इस मामले में दोषी करार दिए गए एकमात्र शख्स इंदरजीत सिंह रेयात को पिछले साल रिहा कर दिया गया था। वह 15 साल तक जेल में रहा। दो अन्य आरोपियों अजायब सिंह बागड़ी और रिपुदमन सिंह मलिक को निचली अदालत ने मार्च, 2005 में ही बरी कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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