'भारत-अमेरिका के अग्रणी व्यापारी संबंधों को मजबूत बनाएं'

वित्त मंत्री भारत-अमरीका के व्यापार समुदाय के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के मंच की संयुक्त बैठक की पूर्व संध्या पर वाश्िंागटन में दोनों देशों के व्यापार समुदाय के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और नेतृत्वकर्ताओं के साथ एक वार्ता में भाग ले रहे थे।

इस बैठक का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के मंच की संयुक्त बैठक में विचार किए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा करने के लिए किया था।

इस अवसर पर वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ न सिर्फ वित्त और कारोबार में बल्कि कृषि, बीमा, शिक्षा, रोग निदान संबंधी शोध समेत स्वास्थ्य जैसे अन्य क्षेत्रों में भी नजदीकी सहयोग की आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में अवसंरचना क्षेत्र में 850 अरब अमरीकी डलर के भारी निवेश की गुंजाइश है और अगले पांच वषों में 2़ 7 करोड़ खरब अमरीकी डलर की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान वर्ष में राजकोषीय घाटे को 5़ 5 प्रतिशत पर और वर्ष 2011-12 के अंत तक इसे 4़1 प्रतिशत पर लाना चाहता है।

एक प्रश्न का उत्तर देते हए मुखर्जी ने कहा कि चीन की लचीली नीति की घोषणा से और जहां तक उसकी मुद्रा युआन का सवाल है तो उससे भारत खुश है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित के मद्देनजर इस नीति का अनुसरण करेगा।

इस अवसर पर अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर, भारत के शीर्ष उद्योगपतियों में हीरो होंडा के पवन मुंजल, इन्फोसिस टेक्नोलजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक एस़ गोपालकृष्णन, बायकोन की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ और अपोलो हस्पीटल्स की प्रबंध निदेशक प्रीता रेड्डी के अलावा अमरीका के शीर्ष उद्योगपति भी उपस्थित थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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