पास्को के साथ समझौते का नवीनीकरण होगा
पास्को ने 22 जून, 2005 को तटीय जगतसिंहपुर जिले में पारादीप कस्बे के पास 120 लाख टन क्षमता वाले इस्पात संयंत्र के लिए एक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया था।
इस्पात एवं खान मंत्री रघुनाथ मोहंती ने आईएएनएस को बताया, "पास्को ने एमओयू को पांच साल का विस्तार देने के लिए इस महीने के प्रारंभ में हमें लिखा है। हम इसका परीक्षण कर रहे हैं। सरकार सही समय पर उचित निर्णय लेगी।"
मोहंती ने किसी विवरण का खुलासा किए बगैर कहा, "समझौते में शामिल नियम एवं शर्ते बदल सकती हैं। फिलहाल आईपीआईसीओएल (उड़ीसा औद्योगिक संवर्धन एवं निवेश निगम लिमिटेड) आवेदन का परीक्षण कर रहा है।"
आईपीआईसीओएल राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नोडल एजेंसी है।
पास्को परियोजना को 2016 तक स्थापित किया जाना है। कई कारणों से यह परियोजना पीछे हो गई है। स्थानीय निवासी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।
परियोजना के लिए लगभग 4,004 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसमें से 2,900 एकड़ भूमि वन क्षेत्र है। राज्य सरकार को वन भूमि के अधिग्रहण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिल गई है।
इस परियोजना में हालांकि अभी तक कोई प्रगति नहीं हो पाई है, क्योंकि हजारों की संख्या में ग्रामीण इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना के कारण वे अपनी जमीन से विस्थापित हो जाएंगे और उनकी पान की खेती उजड़ जाएगी।
पास्को-इंडिया के महाप्रबंधक (विदेश संबंध) सिमंता मोहंती ने आईएएनएस से कहा, "समझौते का नवीनीकरण राज्य सरकार के अधिकार में है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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