इसराइल ने दी गज़ा के लिए थोड़ी छूट

इसराइल ने गज़ा पट्टी में अपनी नाकेबंदी में ढील देने की योजना के विवरण पेश करते हुए कहा है कि अब वहाँ आम लोगों की ज़रुरत के सामान ले जाने की छूट होगी.एक नई सूची पेश करते हुए कहा गया है कि जो भी सामान प्रतिबंधित सामग्रियों की इस सूची में शामिल नहीं होगा उसे गज़ा ले जाने से नहीं रोका जाएगा.उम्मीद की जा रही है इसके बाद गज़ा पट्टी में मानवीय सहायता, खाद्य सामग्री और भवन निर्माण सामग्री पहुँचाई जा सकेगी.
इसराइल ने वर्ष 2005 से गज़ा की नाकेबंदी कर रखी है लेकिन पिछले दिनों वहाँ सहायता सामग्री ले जा रहे एक जहाज़ पर हमले में नौ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौत के बाद से इसराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव था कि वह गज़ा को लेकर अपनी नीति में बदलाव करे.इसराइल ने फ़िलहाल नाकेबंदी में कुछ ढील देने की बात कही है लेकिन फिलिस्तीनी संगठनों की मांग है कि गज़ा पट्टी की नाकेबंदी पूरी तरह से ख़त्म की जानी चाहिए.
सुरक्षा मंत्रिमंडल की एक बैठक के बाद इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने बताया कि गज़ा में दाखिल होने से पहले साथ ले जाई जा रही वस्तुओं की जानकारी देने के मौजूदा नियम की जगह अब प्रतिबंधित वस्तुओं की एक छोटी सूची बनाई जाएगी.इस सूची में खास तौर से हथियार और हथियार बनाने के सामान का ज़िक्र होगा, लेकिन खाद्य सामग्री के साथ सभी मानवीय इस्तेमाल की वस्तुओं, औद्योगिक कच्चा माल और निर्माण कार्य के लिए सामान लाए जाने की अनुमति होगी.
उन्होंने कहा, "गज़ा को लेकर हमारी नीति साफ है. हमास जिस सामान का इस्तेमाल इसराइल के ख़िलाफ़ हथियारों और रॉकेट के ज़रिए आतंकी हमले करने में इस्तेमाल करता है, हम वो सब गज़ा से दूर रखना चाहते हैं."नेतन्याहू ने नाकेबंदी में ढील देने की घोषणा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से मध्यपूर्व के विशेष दूत टोनी ब्लेयर से बातचीत के बाद की.
उन्होंने इस घोषणा के साथ इसराइली सैनिक गिलाड शलित की रिहाई की भी मांग की, जिसे हमास ने वर्ष 2006 में पकड़ लिया था.नेतन्याहू से हुई बातचीत के बाद टोनी ब्लेयर ने कहा, "सच्चाई तो ये है कि गज़ा में लोगों का जीना मुहाल हो गया है. वहीं पश्चिमी तट पर प्रगति हुई है, वहां फ़लस्तीनी अधिकारी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर काम कर रहे हैं. इसराइल का ये फ़ैसला गज़ा में स्थिति बहुत बदल देगा."
अमरीका ने भी इसराइल की घोषणा का स्वागत किया है. जबकि फ़लिस्तीनी संगठनों ने इसे नाकाफ़ी बताते हुए लोगों और सामान के स्वतंत्र आदान-प्रदान की मांग की है.संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक पाबंदियों की वजह से गज़ा में रह रहे लोगों को इस वक्त उनकी मूलभूत सुविधाओं का सिर्फ एक पाँचवाँ हिस्सा ही मिल पा रहा है.अमरीका ने भी इसराइल की घोषणा का स्वागत किया है. जबकि फ़लस्तीनी संगठनों ने इसे नाकाफ़ी बताते हुए लोगों और सामान के स्वतंत्र आदान-प्रदान की मांग की है.












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