'प्राध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष ही रखी जाए'
सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में आयोजित शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में यह बात कही। डा. जितेन्द्र सिंह द्वारा उठाए गए इस मुद्दे का अधिकांश राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने समर्थन किया।
सिंह ने बताया कि राजस्थान में उच्च शिक्षा में नामांकन करवाने वाले छात्रों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत 12.5 प्रतिशत के मुकाबले बहुत अधिक 18.23 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष ही रखा जाना उचित है।
सिंह ने प्रदेश में नवोदय विद्यालय एवं केन्द्रीय विद्यालय की तर्ज पर नए महाविद्यालय खोलने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि प्रदेश में खोले जाने वाले 'मॉडल कॉलेज' के लिए केन्द्र सरकार 30 प्रतिशत के स्थान पर 70 प्रतिशत सहायता उपलब्ध करवाए।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा वित्त निगम (नेशनल एज्यूकेशन फाइनेंस कार्पोरेशन) की स्थापना किए जाने संबंधी प्रस्ताव का स्वागत किया। डा. सिंह ने बताया कि ऐसा होने पर राजस्थान के 12 लाख कमजोर एवं गरीब छात्रों को चार प्रतिशत के न्यूनतम ब्याज दर पर बैंक से ऋण मिलेगा। साथ ही कमजोर आधारभूत सुविधाओं वाली उच्च शिक्षा संस्थान को भी इतनी ही ब्याज दर पर ऋण आदि सुविधाएं मिल सकेगी।
बैठक में राजस्थान के उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव विपिन चन्द्र शर्मा ने भी कई उपयोगी सुझाव दिए।
इंडो-एशियन न्यूज सíवस।












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