मोबाइल टॉवर विकिरण के भय के साये में दिल्ली

प्रतिभा राजू

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके के लोगों ने कुकुरमुत्ते की तरह उग आए मोबाइल टॉवर हटाने की मांग की है। उनका आरोप है कि इससे निकलने वाले विद्युतचुंबकीय विकिरण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।

शालीमार बाग (पूर्व) में बीसी ब्लाक में रहने वाले सुभाष कपूर ने आईएएनएस से कहा कि आइडिया सेलुलर का टॉवर जिस मकान में वह किराये पर रहते हैं, उसकी तीसरी मंजिल पर मकान मालिक की सहमति से लगाया गया है।

चूंकि टेलीकॉम कंपनियां टॉवर लगाने के बदले मकान मालिकों को भारी किराया अदा करती हैं इसलिए मकान मालिक टॉवर लगाने की सहमति दे देते हैं।

सुधा शर्मा ने नाराजगी भरे अंदाज में कहा, "आखिर ये टेलीकॉम कंपनियां निवासियों की समस्या क्यों नहीं समझतीं। मोबाइल टॉवर की वजह से हमें काफी परेशानी हो रही है। "

उन्होंने कहा कि दो साल पहले ये मोबाइल टॉवर लगाए गए थे। उसके बाद से हम सिरदर्द, थकावट, विकिरण की वजह से उल्टी आदि स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हमारा छह वर्षीय बेटा से इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है।

उन्होंने कहा, "मेरे चिकित्सक ने इस बात की पुष्टि की है कि इस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं मोबाइल टॉवर विकिरण की वजह से हो रही हैं। "

शर्मा ने कहा कि उनका पड़ोसी रीढ़ के कैंसर से पीड़ित है जबकि एक अन्य पड़ोसी को हृदय संबंधी समस्या है।

दिल्ली नगर निगम के अनुसार दिल्ली में 5,000 मोबाइल टॉवर हैं। इनमें से 2,500 अवैध रूप से लगाए गए हैं जो कि अधिकतर रिहायशी इलाकों में हैं।

नगर निगम ने स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर अवैध मोबाइल फोन टॉवर को सील करने की चेतावनी दी थी लेकिन इसी बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक समिति गठित कर इन टॉवरों से होने वाली बीमारियों का अध्ययन करने का आदेश दे दिया। जिसकी वजह से सील करने की प्रक्रिया रोक दी गई और सेलुलर संचालकों नोटिस जारी कर आठ जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

नगर निगम के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि निगम के नियमों के विरुद्ध कई मोबाइल टॉवर रिहायशी कालोनियों, विद्यालय, अस्पताल के नजदीक स्थापित किए गए हैं। जबकि इन स्थलों के नजदीक टॉवर लगाने की अनुमति नहीं है।

औद्योगिक जैवप्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नेहा कुमार ने कहा कि विद्युतचुंबकीय तरंगें शरीर में ऊष्मा पैदा करती हैं और विकिरण का स्तर ज्यादा होने पर यह एंजाइम सिस्टम और डीएनए की संरचना में परिवर्तन ला सकता है।

अपोलो अस्पताल में ऑनकॉलोजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक जी.के. जाधव ने कहा कि टॉवर के विकिरण से सबसे अधिक प्रभावित होने वालों में दिल के मरीज होते हैं, खासकर वे जो पेसमेकर पर आश्रित होते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे पास ब्रेन ट्यूमर के कई ऐसे मरीज आते हैं जो लगातार विद्युतचुंबकीय विकिरण के संपर्क में रहते हैं।

आइडिया सेलुलर के मुख्य संचालन अधिकारी रजत मुखर्जी ने हालांकि इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि उनकी कंपनी द्वारा देश भर में लगाए गए टॉवर हानिकारक नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि विकिरण का स्तर टेलीकाम इंजीनियरिंग सेंटर द्वारा परखा गया है और ये सभी सामान्य स्तर के हैं। इसके बावजूद अगर निवासी चाहते हैं कि टॉवर हटाए जाएं तो उन्हें कंपनी से सीधे संपर्क करना चाहिए।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ विकिरण के स्तर को 9.2 वाट प्रतिवर्गमीटर तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। जबकि अन्य देशों में यह 50 से 300 मीटर की परिधि में 0.001 से 0.24 वाट प्रतिवर्गमीटर निर्धारित किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+