भाजपा कार्यसमिति की बैठक के केंद्र में बिहार चुनाव
आगामी 12 जून से पटना के मौर्य होटल में बसाए गए चाणक्य नगर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक आरंभ हो रही है। यह बैठक दो दिनों यानी 13 जून तक चलेगी। इसी दिन पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में स्वाभिमान रैली भी आयोजित की गई है।
कार्यसमिति की बैठक के मुख्य एजेंडे के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों का कहना है कि आगामी बिहार विधानसभा के चुनाव में राजग की जीत सुनिश्चित कर उसे फिर से सत्ता में लाना हमारा एकमात्र लक्ष्य है। लेकिन दबी जुबां से पार्टी के इन नेताओं का यह भी कहना है कि प्रदेश में भाजपा के जनाधार को बढ़ाना और इसके साथ ही गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करना भी उनका लक्ष्य होगा। इस संबंध में कार्यसमिति की बैठक में रणनीति भी बनाई जाएगी।
पार्टी की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष संजय मयुख ने आईएएनएस को बताया, "राष्ट्रीय कार्यसमिति का एकमात्र लक्ष्य बिहार चुनाव में राजग को फिर में सत्ता में लाना है। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा का लक्ष्य बिहार में भी खुद को गठबंधन में बड़े भाई के रूप में स्थापित करना नहीं रहेगा, इसके जवाब में उन्होंने कहा, निश्चित तौर पर सत्ता में आना हमारे गठबंधन की शीर्ष प्राथमिकता है। पार्टी संगठन को मजबूत करने और जनाधार बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
इससे पहले 1995 में बिहार में जब भाजपा की पिछली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई थी, उस समय भाजपा राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी का स्थान हासिल करने में कामयाब हुई थी। इस बार जब यह बैठक हो रही तो पार्टी जदयू के साथ सत्ता में है और प्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर है।
वर्तमान में विधानसभा में भाजपा के 54 सदस्य हैं जबकि जदयू के सदस्यों की संख्या 88 है। राष्ट्रीय स्तर पर राजग में भाजपा जहां बडे भाई की भूमिका में है वहीं बिहार में जदयू को यह स्थान हासिल है। ऐसे में पार्टी के प्रदेश के नेताओं के एक बड़े वर्ग को यह बात हमेशा सालती भी रहती है। समय-समय पर संभवत: इसीलिए राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर कथित तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों में खेलने का आरोप भी लगता रहता हैं।
पार्टी के एक प्रदेश पदाधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राज्य में हमारी गठबंधन सरकार है लेकिन सरकार की उपलब्धियों का सारा श्रेय अकेले नीतीश कुमार के सिर बंध जाता है। इसलिए हमें एक ऐसी रणनीति बनानी होगी जिससे हमारा गठबंधन भी बना रहे और सांगठनिक स्तर पर हम मजबूत भी हों।"
बैठक में बिहार के अलावा नक्सलवाद के खिलाफ और केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की 'विफलताओं' को लेकर पर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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