पेट्रोल-डीजल की कीमत में 3.5 रुपये वृद्धि की संभावना
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सोमवार को होने जा रही बैठक के संबंध में मंत्रियों के आधिकारिक समूह के सदस्य पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रणव मुखर्जी को इस जानकारी दी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "ईंधन कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने का फैसला खासकर पेट्रोल और डीजल को नियंत्रण मुक्त करना लगभग तय है।" लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के कुछ सहयोगी दल खासकर तृणमूल कांग्रेस इस कदम का विरोध कर रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ईंधन कंपनियों को इसकी ब्रिकी पर हो रहे लगातार घाटे के कारण इस साल 72,000 करोड़ रुपये का घाटा होने के अनुमान के बाद यह बैठक आयोजित की जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें वर्ष 2003 के 28 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से बढ़कर 2008 में 147 डॉलर प्रति बैरल हो गई थीं जो कि अब 75 डॉलर प्रति बैरल (एक बैरल बराबर 159 लीटर) के स्तर पर बनी हुई हैं। तेल कीमतें बढ़ने से सरकार को तेल कंपनियों को ईंधन पर भारी सब्सिडी देनी पड़ रही है।
मंत्रियों के इस समूह में कृषि मंत्री शरद पवार, रसायन एवं उर्वरक मंत्री एम. के. अलागिरी, रेल मंत्री ममता बनर्जी, सड़क परिवहन मंत्री कमलनाथ और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया शामिल हैं।
तेल विपणन कंपनियों को पिछले साल 46,051 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, सरकार ने इन कंपनियों को 26,000 करोड़ रुपये की मदद दी थी।
वित्त और तेल मंत्रालय सब्सिडी के बढ़ते बोझ को जल्द से जल्द कम करने के लिए किरीत पारिख समिति द्वारा दी गई ईधन कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की सिफारिश को लागू करना चाहते हैं।
पिछले एक साल में सरकार पहले ही दो बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी है इसलिए तेल कंपनियों का घाटा 90,000 करोड़ रुपये के बजटीय अनुमान से ज्यादा होने के आसार नहीं हैं।
इस साल 26 फरवरी को प्रस्तुत किए गए बजट में सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 2.71 रुपये और 2.55 रुपये बढ़ाए थे, इससे पहले 2 जुलाई को सरकार ने इनकी कीमतों में 4 रुपये और 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी।
फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 47.93 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 38.10 रुपये प्रति लीटर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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