लौटेगी कोलकाता के ऐतिहासिक सोवा बाजार पैलेस की रौनक
कोलकाता, 3 जून (आईएएनएस)। कोलकाता में ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की कोशिशों के तहत सोवा बाजार पैलेस की रौनक वापस लाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। इसे 18वीं शताब्दी में राजा नबकृष्णा देब ने बनाया था।
इसके लिए नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज ने एक योजना तैयार की है। संगठन के सदस्य और सोवा बाजार राजबाड़ी बोर्ड के सदस्य रतीन देब ने आईएएनएस को बताया, "हमने ठाकुर दालान को दुरूस्त करना शुरू किया है जो यहां के प्राचीन दुर्गा पूजा स्थलों में से है। उल्लेखनीय है कि ठाकुर दलान का ऐतिहासिक महत्व है।
कोलकाता में सबसे पहले 1757 में इसी स्थल पर दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया था। इसी साल यहां प्लासी की लड़ाई में बंगाल अंग्रेजों से हार गया था। इस वर्ष की पूजा में वॉरेन हेस्टिंग्स और लार्ड क्लाइव ने हिस्सा लिया था।
इस दालान का एक और महत्व है। वर्ष 1893 में शिकागो में विश्व धार्मिक सम्मेलन में भारत का नेतृत्व करने के बाद स्वामी विवेकानंद का यहीं पर नागरिक अभिनंदन किया गया था।
देब ने बताया, " इसके बरामदे में पांच अलंकृत मेहराबे हैं। हमने का खोया गौरव बहाल करने के लिए यहां मुर्शिदाबाद से उन्दा कलाकारों के एक समूह को बुलाया है।" देब के मुताबिक पैलेस के अंदर के सभी आवासीय क्वार्ट्स को दुरुस्त किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर इस कार्य के लिए 'हेरिटेज कमिशन ऑफ पश्चिम बंगाल' और कोलकाता नगर निगम भी इस परियोजना में मदद करेंगे।
फिलहाल संगठन देश और विदेश से भी इस परियोजना के लिए धनराशि जुटा रहा है। परियोजना के प्रवक्ता ने बातया कि प्रारंभिक तौर पर 1.8 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया था।
देब ने कहा, पैलेस के अंदरुनी हिस्सों के लिए मसलन ठाकुर दालान, क्वार्ट्स के लिए 10 लाख रुपये से अधिक खर्च किये जा चुके हैं। इस परियोजना का खाका तैयार करने वाले मनीष चक्रवर्ती ने आईएएनएस को बताया कि पहली बार पैलेस के मुख्य क्वार्ट्स को भी दुरुस्त किया जा रहा है। वह इस परियोजना रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं।
इसे कोलकाता नगर निगम और 'हेरिटेज कमिशन ऑफ पश्चिम बंगाल' द्वारा पारित होना भी जरूरी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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