जनजातीय कृषि प्रणाली पर कार्यशाला का उद्घाटन

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। जनजातीय मामलों के मंत्री कांतिलाल भूरिया ने मंगलवार को यहां एक दिवसीय पारम्परिक जनजातीय कृषि प्रणाली (थास) पर कार्यशाला का उद्घाटन किया।

भूरिया ने कहा कि उनका मंत्रालय चाहता है कि देश में पारम्परिक जनजातीय कृषि प्रणालियों के समर्थन के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया जाए।

भूरिया ने कहा कि मध्य प्रदेश के धुर अंदर के क्षेत्र का अनुसूचित जनजाति के सदस्य होने के नाते उन्होंने देखा है कि किस प्रकार जनजातीय परिवार सिंचाई के लिए बहुत ही छोटे श्रोत से पानी निकालते हैं, जमीन में नमी बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के बांध और नालियां बनाते हैं, वर्षा की प्रतिकूल परिस्थितियों की आशंका से परिपक्वता की विभिन्न अवधियों वाली फसलें उगाते हैं और पशुओं के पालन-पोषण के लिए कटी हुई फसल की फूस उपलब्ध करते हैं।

आज भी, जब अधिकांश क्षेत्रों में अधिक उपज वाली फसलें उगाई जा रही हैं, विशेष अवसरों के लिए और जनजातीय देवी-देवताओं की पूजा के लिए इन परम्परागत फसलों की अधिक मांग है। इसलिए, इन परिस्थितियों में और खासकर संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता संरक्षण वर्ष में मनुष्य पुरानी तकनीकें, फसल उगाहने के पुराने तरीकों और विस्तृत किस्मों को समाप्त होने नहीं दे सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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