भारत ने अमेरिका से उच्च प्रौद्योगिकी व्यापार की वकालत की (राउंडअप)

वाशिंगटन, 2 जून (आईएएनएस)। परमाणु दायित्व कानून बनाने और आयातित परमाणु प्रौद्योगिकी को सेफगार्ड मुहैया कराने की प्रतिबद्धता के प्रति अमेरिका को आश्वस्त करते हुए भारत ने विकसित प्रौद्योगिकी उत्पादों के आपसी व्यापार को बढ़ाने की वकालत की है।

ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते से आगे बढ़ते हुए भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को परिभाषित करते हुए विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कहा, "सरकार परमाणु दायित्व कानून बनाने को लेकर प्रतिबद्ध है। हम अमेरिकी कंपनियों द्वारा भारत में निवेश होता देखना चाहते हैं।"

भारत-अमेरिका व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) के 35वें वर्षगांठ पर इकट्ठा हुए करीब 300 प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कृष्णा ने कहा, "हम दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत होते देखना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा,"भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट से उबर रही है, और अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपनी गति हासिल कर रही है, ऐसे में व्यापार और निवेश का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।"

कृष्णा ने कहा, "लेकिन, हमारे संबंधों को परिभाषित करने वाली नई खोजों और इसकी सही क्षमता को हासिल करने के लिए हमें उससे आगे बढ़ना होगा।"

गुरुवार को पहली सामरिक वार्ता की अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ अध्यक्षता करने वाले कृष्णा ने कहा कि दोनों देशों की समृद्धि और सामरिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए हमारी आर्थिक साझेदारी में पर्याप्त क्षमता है।

उन्होंने कहा कि गुरुवार की वार्ता में आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई, परमाणु सुरक्षा को मजबूत बनाने और अफगानिस्तान के मसले पर व्यापक चर्चा होगी।

उन्होंने कहा, "हमारे लिए अपनी यात्रा को प्रदर्शित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका साबित होगा कि कैसे दो महान लोकतंत्र नई उपलब्ध्यिों को हासिल करने की कोशिश करते हैं।"

इस बीच दक्षिण एशिया मामलों के अमेरिकी विदेश मंत्री राबर्ट ब्लेक ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाल के बयान से अमेरिका काफी उत्साहित है। सिंह ने परमाणु दायित्व विधेयक को पास कराने की पूरजोर वकालत की थी।

उन्होंने कहा, "मनमोहन सिंह की प्रतिक्रिया से अमेरिका काफी उत्साहित है। हम प्रधानमंत्री पर विश्वास करते हैं।"

इससे पहले अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के दावे पर सधा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि सुरक्षा परिषद के सुधार में भारत की एक अहम भूमिका है। उसने यह भी कहा कि हर हाल में सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता बनी रहनी चाहिए।

अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्‍स ने मंगलवार को कहा, "वैश्विक मामलों में भारत के बढ़ती भूमिका के चलते यह स्पष्ट है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सुधार प्रकिया में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"

भारत को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य समर्थन करने के सवाल पर अमेरिकी नीति निर्धारकों में से एक बर्न्‍स ने कहा, "सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा वर्ष 2010 की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "हम सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता को कायम रखना चाहते हैं। परंतु अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका प्रशासन न सिर्फ सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए गंभीर है बल्कि वह इसका विस्तार भी करना चाहता है।"

पत्रकारों द्वारा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता पर अमेरिका का रुख जानने के सवाल को दोहराए जाने पर बर्न्‍स ने कहा, "मैं समझता हूं कि अमेरिका के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और मेरा मानना है कि भारत इस प्रक्रिया का हिस्सा जरूर बनेगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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