सर्वोच्च न्यायालय ने दिया दलितों की हिफाजत का आदेश (लीड-1)
न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और न्यायमूर्ति सी.के.प्रसाद की सदस्यता वाली सर्वोच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि दलितों को सुरक्षा मुहैया कराने में विफलता को गंभीरता से लिया जाएगा।
चण्डीगढ़ से करीब 300 किलोमीटर दूर हिसार के एक गांव से 21 अप्रैल को 150 दलितों (वाल्मीकियों) को गांवों से खदेड़ दिया गया था और उनके मकानों में आग लगा दी गई थी।
न्यायालय ने सरकार को 60 दिनों के भीतर दलितों के उन 18 मकानों का पुनर्निर्माण कराने का भी आदेश दिया, जिन्हें 21 अप्रैल को जला दिया दिया गया था।
न्यायालय ने कहा कि पीड़ित परिवार के एक-एक सदस्य को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत या फिर राज्य सरकार की ऐसी ही किसी योजना के तहत रोजगार दिलाया जाए।
हरयिाणा के महाधिवक्ता एच.एस. हुड्डा ने अपने कार्यालय के दो अधिवक्ताओं को मिर्चपुर जाने और दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित वाल्मीकि मंदिर का दौरा करने को कहा है, जहां मिर्चपुर से आए दलित परिवार शरणार्थी के रूप में रह हे हैं।
अदालत ने कहा कि महाधिवक्ता की टीम हालात का जायजा लेकर तुलनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और यह बताएगी कि इस घटना का मूल कारण क्या है और इसके प्रभावितों के पुनर्वास के लिए सरकारी स्तर पर क्या किया जा रहा है।
इस हमले में 70 साल के एक बुजुर्ग और उनकी 18 वर्षीया विकलांग पोती की मौत हो गई थी और कम से कम 18 मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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