लघु कला में माहिर है अनुराग
फ रूखाबाद, 2 जून(आईएएनएस)। छोटी-छोटी चीजें इकट्ठा करने के जुनून ने बिना कोई प्रशिक्षण लिए उत्तर प्रदेश के एक 23 वर्षीय युवा को लघु कला मं माहिर बना दिया।
हम बात कर रहे हैं फरूखाबाद के अनुराग कश्यप की जिसने एक नख(नाखून) के आकार की पुस्तक में डॉ. राम मनोहर लोहिया का संपूर्ण जीवन संघर्ष लिखकर, गेंहू के दाने की शक्ल के मिट्टी के दिये(दीपक) और मात्र 10 मिलीमीटर की लड़की की कुर्सी बनाकर अपनी लघु कला का नायाब नमूना पेश किया है।
अनुराग ने आईएएनएस से कहा, "मेरा मानना है कि छोटी-छोटी चीजों को इकट्ठा करने के जुनून ने मेरे अंदर इस कला को जन्म दिया। मैं अपनी बनाई सभी चीजों का प्रदशर्नी लगाऊं। कुछ सरकारी अधिकारियों जिनको मैंने अपनी लघु कलायें उपहार में दी हैं, उन्होंने मझे प्रदशर्नी आयोजित कराने का भरोसा दिलाया है। मैं उस दिन का बड़ा बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।"
वैसे तो अनुराग को अपनी हर लघु कला चाहे वह 9 मिलीमीटर की ताश की गड्डी हो या चावल के दानों पर बनाई जटिल आकृतियां या राम मनोहर लोहिया के जीवन पर आधारित नख के आकार की पुस्तक हो या आलपीन के सिर के वाले भाग की तरफ स्थापित लकड़ी की कुर्सी, सभी दिल के बहुत करीब हैं, लेकिन समाजवाद के प्रवर्तक डॉ राम मनोहर लोहिया पर लिखी किताब उनके दिल के ज्यादा करीब है। वह कहते हैं कि इस किताब ने सही मायने में न केवल मुझे प्रसिद्धि दिलाई बल्कि मुझे 51,000 रुपये का पुरस्कार भी दिलवाया।
अनुराग ने कहा कि तकरीबन दो महीने पहले समाजवादी पार्टी(सपा) के लखनऊ मुख्यालय में जब उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अखिलश यादव को यह किताब भेंट की तो हर किसी ने उनकी कला की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यादव किताब देखकर इतना बहुत प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत पुरस्कार की घोषणा कर दी। हाथ से लिखी नाखून के आकार की 100 पृष्ठों की पुस्तक में लोहिया के संपूर्ण जीवन संघर्ष और आजादी में उनके योगदान को दर्शाया गया है।
अनुराग के मुताबिक इस कला में कामयाब होने के लिए आप एक अच्छे पर्यवेक्षक हों क्योंकि लघु रूप में ही आपको मूल वस्तु का सब कुछ शामिल करना होता है।
स्नातक की पढ़ाई कर चुके अनुराग पिछले छह साल के इस लघु कला का अभ्यास कर रहे हैं। इस दौरान कई लोगों ने अनुराग से उनके द्वारा बनाई गई चीजों को खरीदने के लिए संपंर्क किया, लेकिन उन्होंने हर प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया।
वह कहते हैं कि मैं लघु कला का निर्माण अपनी संतुष्टि के लिए करता हूं। मुझ्झे लगता है कि अगर मैंने इसे पैसा कमाने का जरिया बनाया तो वह इस कला के साथ न्याय नहीं होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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