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काबुल में जिरगा की सभा के करीब रॉकेट हमला (लीड-2)

काबुल, 2 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार को हो रही जिरगा की सभा के आयोजनस्थल के बाहर तालिबानियों ने कम से कम तीन रॉकेट दागे और सुरक्षाकर्मियों के साथ गोलीबारी की।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यह हमला अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई द्वारा जिरगा के उद्घाटन के कुछ देर बाद हुआ।

इस बैठक में सैकड़ों कबायली मुखिया और सांसद हिस्सा ले रहे थे। एक रॉकेट जिरगा के शिविर से महज 500 मीटर की दूरी पर आकर गिरा। काबुल में हेलीकॉप्टर मंडरा रहे थे और गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही थीं।

राष्ट्रपति के प्रवक्ता वाहिद उमर ने बताया कि ये रॉकेट महिलाओं के वेश में तालिबानी आत्मघाती हमलावरों ने दागे और सुरक्षाबलों के साथ गोलीबारी की।

उन्होंने बताया कि दो हमलावर मारे गए और तीसरे को हिरासत में ले लिया गया।

तालिबान के प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए फोन पर बताया कि रॉकेट हमलों का मकसद जिरगा की बैठक रुकवाना था।

करजई अपना उद्घाटन भाषण दे ही रहे थे जब पहला विस्फोट हुआ। वह सही-सलामत रहे और उन्होंने भाषण नहीं रोका।

करजई ने कहा, "चिंता मत कीजिए। बैठ जाइए, सबकुछ ठीक है। हम इसके आदी हैं। हर कोई इसका आदी हो चुका है। और तो और मेरा तीन साल का बेटा भी इसका आदी हो चुका है।"

अमेरिकी हमले की वजह से अफगानिस्तान छोड़कर चले गए तालिबानी लड़ाकों से वापस लौटने का अनुरोध करते हुए करजई ने कहा कि उनकी सरकार उन लड़ाकों को नागरिक जीवन में दोबारा शामिल करेगी।

करजई ने कहा, "हजारों तालिबानी और अन्य हैं..वे हमारे मुल्क के शत्रु नहीं हैं।..बल्कि मेरे और आपके जैसे साधारण लोग हैं।"

उन्होंने कहा, "मैं फिर कहता हूं मेरे तालिब भाइयों, इंशाल्लाह आप वापसी का रुख करें, इस देश को दुख मत पहुंचाइए और अपने आपको बरबाद मत कीजिए।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को माफ नहीं करेंगे।

अपना भाषण समाप्त करने के बाद करजई वहां से चले गए। जिरगा आयोग के अध्यक्ष फारुक वारदाक ने कहा, "हालात सुरक्षा बलों के सौ फीसदी काबू में हैं।"

जिरगा में पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी को जिरगा का प्रधान चुना गया।

इस जिरगा में कबायली मुखिया, सांसद, सामाजिक राजनीतिक हस्तियां और सरकारी अधिकारियों सहित करीब 1600 लोग तालिबान के साथ सुलह के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा के लिए एकत्र हुए।

तालिबान जिरगा का बहिष्कार कर रहे हैं। उनका दावा है कि जिरगा अमेरिकी और अन्य नाटो देशों के हितों की पूर्ति के लिए है।

इस बीच अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि उन्हें इसी तरह के हमलों की आशंका थी।

जिरगा में करजई की 36 पृष्ठों की सुलह योजना पर चर्चा होगी। यह सभा शुक्रवार को संपन्न होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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