तिब्बत के लिए रैंप पर उतरेंगी सुंदरियां
विशाल गुलाटी
धर्मशाला, 2 जून (आईएएनएस)। ये सुंदरियां 'मिस तिब्बत' प्रतियोगिता को कभी भी वैश्विक सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं बना सकेंगी लेकिन तिब्बत की ये चार निर्वासित महिलाएं चीनी दमन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध और तिब्बत की समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए रैंप पर उतरेंगी।
धर्मशाला के नजदीक मैकलियोडगंज में चार से छह जून तक नौवीं 'मिस तिब्बत' प्रतियोगिता का आयोजन होगा। प्रतियोगिता के आयोजकों और प्रतिभागियों के लिए यह प्रतियोगिता तिब्बत की समस्याएं उठाने का एक मंच है यद्यपि उनके राजनीतिक नेता सौंदर्य प्रतियोगिताओं को तिब्बत की संस्कृति के खिलाफ मानते हैं।
तेईस वर्षीय तेनजिन नोरजोम ने आईएएनएस से कहा, "मैं अपने देश को चीनी कब्जे से स्वतंत्र देखना चाहती हूं। मैं रैंप के जरिए अपनी मातृभूमि को छोड़ने के लिए (1959) मजबूर हुए तिब्बतियों की समस्याएं उठाना चाहती हूं। यह दमन के खिलाफ विरोध का शांतिपूर्ण तरीका है।"
तेनजिन कहती हैं, "यदि मैं यह सौंदर्य प्रतियोगिता जीतती हूं तो मैं दुनियाभर में तिब्बत की अनूठी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करूंगी।" यद्यपि वह जानती हैं कि चीन की तिब्बत पर आपत्ति के चलते इस प्रतियोगिता की विजेता किसी भी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकती हैं।
एक अन्य प्रतिभागी 22 वर्षीय तेनजिन नेमचोई का विश्वास है कि यह प्रतियोगिता तिब्बती लोगों खासकर तिब्बत से बाहर पैदा और बड़े हुए युवाओं की आकांक्षाओं को प्रदर्शित करने का एक अनूठा तरीका है।
नेमचोई कहती हैं, "हम सभी देशों और खासकर वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से तिब्बती लोगों के खिलाफ सभी प्रकार के दमन रोकने और तिब्बतियों की समस्याएं दूर करने को व्यापक विचार-विमर्श के लिए चीन पर दबाव बनाने का अनुरोध करते हैं।"
सौंदर्य प्रतियोगिता की दो अन्य प्रतिभागी यांगचेन मेटोक और रिनचेन चोडेन मानती हैं कि खूबसूरती और दिमाग उनकी समस्याओं को एकसाथ उठाएंगे।
प्रतियोगिता के निदेशक लोबसांग वांगयाल कहते हैं कि चीन की ओर से इस सौंदर्य प्रतियोगिता का कड़ा विरोध हो रहा है।
वह कहते हैं, "चीन के कड़े विरोध के चलते पूर्व की विजेता अंतर्राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। चीन ने एक 'तिब्बती ब्यूटी क्वीन' प्रतियोगिता शुरू की है लेकिन इसके बाद भी हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इस तरह के आयोजन तिब्बत की स्वतंत्र पहचान को जिंदा रखते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications