विवाह के लिए होता है अपहरण!
पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष अब तक 359 अविवाहित युवकों की अपहरण शादी के लिए की जा चुकी है। आंकडों के अनुसार ऐसी घटनाएं राज्य के मुंगेर, गया, नवादा, नालंदा, जहानाबाद, नवगछिया, पटना जैसे क्षेत्रों में अधिक घटती हैं।
आंकड़ें बताते हैं कि इस वर्ष जनवरी महीने में जहां 87 युवकों को शादी के लिए अगवा किया गया वहीं फरवरी में 126 ऐसे युवकों का अपहरण किया गया थाा। मार्च में तो ऐसे युवकों की संख्या बढ़कर 146 तक जा पहुंची।
सूत्रों का कहना है कि पढ़े-लिखे तथा खाते-पीते परिवार से संबंधित अविवाहित युवकों का लड़की वाले अपहरण कर लेते हैं और फिर इनका जबरन विवाह करा दिया जाता है।
बताया जाता है कि जब सब कुछ निपट जाता है तब लड़के के परिजनों को आशीष देने के लिए खबर की जाती है। ऐसे में कई शादियां सफल भी हो जाती हैं तो कई बुरी तरह नाकाम हो जाती हैं।
पुलिस विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि ऐसे में लड़के के परिजन तो अपहरण का मामला थाना में दर्ज करवाते हैं परंतु जब जांच होती है तो पता चलता है कि यह अपहरण विवाह के लिए किया गया। ऐसे में पुलिस के पास भी बहुत कुछ करने के लिए नहीं रह जाता है।
इधर, पटना विश्वविद्यालय की प्रोफेसर भारती एस. कुमार इस मसले पर कहती हैं कि इसका प्रचलन मुख्य रूप से उत्तर बिहार में है। वह आईएएनएस से स्पष्ट कहती हैं कि ऐसे विवाह से अभिभावक तो अपनी लड़कियों का विवाह कर मुक्त हो जाते हैं परंतु इस बेमेल विवाह का नकारात्मक प्रभाव पति-पत्नी के जीवन भर देखने को मिलता है।
इस बेमेल विवाह के कारण उन परिवारों का संतुलित विकास भी नहीं हो पाता क्योंकि जीवन भर उस लड़की को ताने सुनना पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण दहेज तथा जाति-बिरादरी में अच्छे और कमाऊ लड़कों की कमी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications