रक्षा क्षेत्र में निजी-सार्वजनिक भागीदारी जरूरी: प्रधानमंत्री

बुधवार को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय तकनीक दिवस पर आयोजित एक सम्मान समारोह में कहा, "रक्षा क्षेत्र में उद्योग जगत की बड़ी हिस्सेदारी जरूरी है। हमारी सरकार सार्वजनिक-निजी साझेदारी को प्रोत्साहित करके यह लक्ष्य पूरा करेगी।"

प्रधानमंत्री ने देश की रक्षा क्षमता में तकनीकी कमियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस कमी को सरकार की ऑफसेट योजना के माध्यम से रक्षा खरीद के जरिए पूरा किया जा सकता है।

देश के रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र का हिस्सा काफी कम है, सरकारी क्षेत्र की कंपनियों और वैश्विक रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों का हिस्सा इसमें काफी ज्यादा है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑफसेट स्कीम निजी क्षेत्र को न सिर्फ विदेशी उपकरण निर्माता कंपनियों से बड़े व्यापार सौदे करने की अनुमति देती है बल्कि कंपनियों के तकनीकी कौशल और निर्माण क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करती है।

रक्षा खरीद नीति में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा के सौदे करने वाली आपूर्तिकर्ता कंपनी को सौदे की कीमत का 30 फीसदी अनिवार्य निवेश भारतीय कंपनियों में करने का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक का विकास एक दिन में नहीं होता। उन्होंने कहा, "दूरदर्शिता, वैज्ञानिक कौशल में वृद्धि और उत्पादन क्षमता में वृद्धि के समेकित नजरिए से ही यह सफलता पाई जा सकती है।"

साथ ही उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थाओं और रक्षा संस्थानों में वृहद साझेदारी के जरिए रणनीति बनाने, शोध को बढ़ावा देने और युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार संगठनों और प्रयोगशालाओं में शोध और विकास को प्रोत्साहन दे रही है। यह महत्वपूर्ण है कि हम युवाओं को शोध गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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