नेपाल में लागू हो सकता है राष्ट्रपति शासन

काठमांडू। नेपाल में एक अप्रत्याशित संवैधानिक संकट पैदा होने की आशंका और प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के पद छोड़ने से इंकार करने के कारण समस्याओं से घिरे देश में शुक्रवार रात से राष्ट्रपति शासन और आपात स्थिति की घोषणा हो सकती है।

एक सर्वदलीय सरकार के गठन का रास्ता साफ करने के लिए पद छोड़ने के माओवादी पार्टी और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के सामने झुकने से इंकार करने वाले प्रधानमंत्री ने मंगलवार को राष्ट्रपति रामबरन यादव से एक लंबी मुलाकात की। देश के संवैधानिक प्रमुख यादव शुक्रवार रात से वास्तव में नेपाल के कार्यकारी बन जाएंगे।

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नेपाल ने राष्ट्रपति से कहा कि वह माओवादियों के दबाव के सामने नहीं झुकेंगे, जिनका कहना है कि केवल प्रधानमंत्री के इस्तीफा देने के बाद ही वह सरकार को जीवनदान देंगे। माओवादियों ने राजशाही के खात्मे के लिए 10 वर्षो तक युद्ध किया और निर्वाचित प्रतिनिधियों के द्वारा देश के पहले संविधान के निर्माण के लिए चुनाव में हिस्सा लिया।

बहरहाल दो वर्ष पहले निर्वाचित संविधान सभा शुक्रवार मध्य रात्रि से भंग होने की स्थिति में है और यह नए संविधान के निर्माण में विफल रही। प्रधानमंत्री आपात स्थिति की घोषणा करके संकट को छह महीने के लिए टाल सकते हैं हालांकि नेपाल में केवल गृहयुद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय ही आपात काल लागू किया जा सकता है।

इस संकट से बाहर निकलने का एकमात्र उपाय संविधान में संशोधन कर संविधान निर्माण की समय सीमा बढ़ाना है। परंतु इसके लिए सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है। लेकिन माओवादियों के विरोध के जारी रहने तक यह असंभव है क्योंकि 601 सदस्यीय संसद में माओवादियों के पास करीब 40 प्रतिशत सीटें हैं।

माओवादियों और सत्तारूढ़ पार्टियों के बीच झगड़े की असली वजह पूर्व गुरिल्ला सेना है। इस समय करीब 19,500 पूर्व विद्रोही गुरिल्लाओं को सरकार हथियारविहीन करना चाहती है। माओवादी चाहते हैं इन सभी को राष्ट्रीय सेना में शामिल कर लिया जाए।

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