'सह आरोपी की गलतियों के लिए जमानत से इंकार न करें'
नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि किसी आरोपी को सिर्फ इसलिए न तो जेल भेजा जा सकता है और न जमानत से ही इंकार किया जा सकता है, कि कोई निचली अदालत सह आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में विफल हो जाती है।
न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और न्यायमूर्ति सी.के.प्रसाद की अवकाशकालीन खण्डपीठ ने कहा, "यदि अदालत सह आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में विफल हो जाती है तो इसका खामियाजा कोई दूसरा आरोपी क्यों भुगते?"
सिंघवी ने कहा, "सच्चाई यह है कि सह आरोपी द्वारा दिखाए गए असहयोग के व्यवहार से याची आरोपी को जमानत से इंकार की बात को सत्यापित नहीं किया जा सकता।"
धोखाधड़ी के एक मामले में फरहत अली को जमानत जारी करते हुए अदालत ने इस सप्ताह के प्रारंभ में कहा कि वह 14 सितंबर, 2007 से जेल में है और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि इस दौरान उसने मुकदमे की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा पहुंचाई हो।
अदालत ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका पर विचार करने से इंकार कर उचित काम नहीं किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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