आम लोगों की मौत पर श्रीलंका सरकार की आलोचना

उसका कहना है कि सुरक्षाबलों ने जानबूझकर आम नागरिकों और अस्पतालों को निशाना बनाया. इस संस्था ने श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के युद्धापराधों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था से जाँच की माँग की है. हालांकि श्रीलंका सरकार आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की बात से साफ़ इनकार करती आई है. श्रीलंका सरकार ने एक आठ सदस्यीय आयोग गठित किया है जो संघर्ष से सबक और मेलमिलाप को बढ़ावा देने के उपाय सुझाएगा.
आरोप
ग़ौरतलब है कि मई, 2009 में श्रीलंका सेना तमिल विद्रोही संगठन को परास्त करने में सफल रही थी. इससे पहले सेना और एलटीटीई के लड़ाकों के बीच देश के उत्तर में लंबा संघर्ष चला. इस दौरान हज़ारों नागरिक भी युद्ध क्षेत्र में फंसे रहे. युद्ध प्रभावित क्षेत्र में संघर्ष की क़ीमत वहाँ फंसे तमिल नागरिकों ने भी चुकाई. कई नागरिक इस संघर्ष के दौरान मारे गए. सैकड़ों घायल हो गए और हज़ारों को विस्थापित होना पड़ा.
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से श्रीलंका सरकार के ऊपर इस बात को लेकर भी दबाव बनाया गया कि संघर्ष के दौरान बड़े हथियारों का इस्तेमाल न किया जाए ताकि आम लोगों को क्षति न हो. साथ ही मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन से बचने की हिदायत भी दी गई.
इसके बाद श्रीलंका सरकार ने संघर्ष के दौरान ऐसे हथियारों के इस्तेमाल न करने की वादा किया पर कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आरोप है कि सेना ने ज़मीनी तौर पर ऐसा नहीं किया और बड़े हथियारों की वजह से कई आम लोग भी संघर्ष के शिकार हुए.












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