प्रधानमंत्री नक्सल विरोधी नीति स्पष्ट करें:भाजपा (लीड-1)
भाजपा नेता अरुण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह समय बहस (कड़ी और नरम नीति के बीच) खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री के सामने आने का है। प्रधानमंत्री को अपना मौन तोड़ना चाहिए। उनको सामने आकर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।"
जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि क्यों केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम,मंत्रालय के अधिकारी और देश की सुरक्षा एजेंसियां स्वयं को नक्सलियों के सामने पंगु पा रही हैं।
उन्होंने कहा, "यह केवल एक मंत्रालय या एक सुरक्षा एजेंसी का सवाल नहीं है। हमें यह जानने की जरूरत है कि सरकार नक्सलियों के खिलाफ केवल अधूरा अभियान चलाएगी या एक पूरी तरह अक्रामक कार्रवाई करेगी।"
उन्होंने कहा कि नक्सली इलाकों में प्रशासन को मजबूत करने के साथ ही विकास गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता है।
जेटली ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कायम व्यापक राष्ट्रीय सहमति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
जेटली ने कहा, "नक्सलियों के खिलाफ अधूरे मन से लड़ाई से कोई फायदा नहीं होने वाला है।"
उन्होंने कहा, "नक्सलवाद के मुद्दे पर संप्रग सरकार में वैचारिक और रणनीतिक मतभेद हैं।"
जेटली ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सली समस्या के प्रति काफी पहले से ही गंभीर है और उससे निपटने के उपाय करती रही है, जबकि केंद्र सरकार ने पिछले एक वर्ष से ही इसे गंभीरता से लेना शुरू किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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