भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार में वृद्धि हो : प्रणब मुखर्जी (लीड-1)
भारत-पाक व्यापार बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "एक जुलाई 2006 से दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौता (साफ्टा) लागू किया गया है, लेकिन साफ्टा के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान ने भारत से आयात पर रोक वाली वस्तुओं की सूची नहीं बनाई है जिससे कि सूची से बाहर वाली वस्तुओं का आयात बढ़ सके।"
उन्होंने कहा, "हालांकि सकारात्मक वस्तुओं की संख्या जुलाई 2006 की 773 वस्तुओं से बढ़कर सितंबर 2009 में 1,934 हो गई है।"
भारत ने 1996 से पाकिस्तान को प्रमुख व्यापारिक वरीयता वाले देश का दर्जा दिया है, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक भारत को यह दर्जा नहीं दिया है।
दोनों देशों के कुल व्यापार में आपसी व्यापार का हिस्सा बहुत कम है। इसमें भी ज्यादातर व्यापार किसी तीसरे देश के जरिए ही किया जाता है।
वर्ष 2000-01 के 25 करोड़ डॉलर की तुलना ने 2007-08 में भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार 2.3 अरब डॉलर तक बढ़ा था लेकिन 2008-09 में यह घटकर 1.8 अरब डॉलर रह गया। एक अनुमान के मुताबिक दोनों देशों के बीच सालाना 10 अरब डॉलर के व्यापार की संभावनाएं हैं।
मुखर्जी ने कहा, "आर्थिक रूप से ज्यादा जुड़ाव रखने वाले और तेजी से विकास करने वाले क्षेत्र शांति की संभावना को बढ़ा देते हैं। व्यापारिक संबंधों में वृद्धि विवादों की आशंका को कम करके शांति के लिए सुलभ माहौल तैयार करता है।"
मुखर्जी ने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, "भौगोलिक निकटता के चलते यहां सस्ते परिवहन की विशाल संभावनाएं हैं। निकटता के चलते कंपनियों को कच्चे माल का भारी-भरकम संग्रह करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी इससे उनकी लागत कम होगी।"
यह बैठक भारतीय उद्योग परिसंघ, भारत-पाकिस्तान सीईओ व्यापारिक संघ और मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया व पाकिस्तान के जंग समूह ने संयुक्त रूप से आयोजित की थी।
बैठक में पाकिस्तान के कपड़ा, कृषि और आईटी क्षेत्र के लोगों के एक शिष्टमंडल ने भी भाग लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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