'चंदन का तिलक' फिर से 'अपनी माटी' में मिल गया : वाजपेयी
शेखावत के निधन से वाजपेयी शोकाकुल हैं। उन्होंने एक घनिष्ठ मित्र, वैचारिक सहयोगी, वरिष्ठ राजनेता, कद्दावर राजनीतिज्ञ और माटी का सपूत खो दिया है।
वाजपेयी ने शेखावत के निधन पर जारी अपने शोक संदेश में कहा, "शेखावत शुरू से जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की यात्रा में हमसफर रहे। पार्टी की नींव के पत्थरों में से वह एक थे। वह पार्टी के जरूर थे मगर उनका व्यक्तिव और सम्पर्क दलगत सीमाओं से कहीं ऊपर था। यही कारण था कि राजस्थान में तीन बार सरकार चलाने में सफल वह सफल रहे। सचमुच वह अजातशत्रु थे। धुर विरोधी भी उनसे अपने मन की बात खुलकर किया करते थे।"
उन्होंने कहा, "एक राष्ट्रीय नेता होकर भी वह कभी अपनी मिट्टी और जड़ों की नहीं भूले। अभावों व अंतर्विरोधों में भी वह समन्वय का रास्ता ढूंढ लिया करते थे। वह एक कुशल प्रशासक , संवेदनशील राजनीतिक और अच्छे मित्र थे।"
वाजपेयी ने कहा, "उनके निधन से भारतीय राजनीति में एक युग का अवसान हो गया। एक जनपुरोधा हमारे बीच से उठ गया। भैरोंसिह की काया हमारे बीच नहीं रही लेकिन उनकी माया हमारी स्मृतियों में सदैव रहेगी।"
उन्होंने कहा, "उनके उपराष्ट्रपति बनने पर मैंने कहा था कि मिट्टी की धूल माथे पर चंदन का तिलक बनकर उभरी है। आज वही चंदन का तिलक फिर से अपनी माटी में मिल गया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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