मारे गए आतंकवादियों के बच्चों को दी जा रही मदद

जम्मू, 11 मई (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर की एक मंत्री का कहना है कि बच्चे बच्चे हैं फिर वह चाहे आतंकवादियों के हों या आतंकवाद पीड़ितों के। यही वजह है कि राज्य सरकार 2009-2010 के दौराने मारे गए आतंकवादियों के 1,441 बेटे-बेटियों को आर्थिक मदद पहुंचा चुकी है।

राज्य की समाज कल्याण मंत्री सकीना इटू कहती हैं, "बच्चे बच्चे होते हैं और वृद्ध कमजोर व असहाय हैं। जब उनकी कोई गलती नहीं है तो वे क्यों भुगतें?"

इटू कहती हैं कि समाज कल्याण विभाग की पुनर्वास परिषद आतंकवाद प्रभावितों को मदद देने के साथ मारे गए आतंकवादियों के बच्चों और उनके वृद्ध अभिभावकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए मासिक वित्तीय मदद दे रही है।

पुनर्वास परिषद ऐसे बच्चों को प्रति माह 750 रुपये देती है।

इटू ने आईएएनएस से कहा, "हम आतंकवाद प्रभावित लोगों के बच्चों को यह मदद पहुंचा रहे हैं, तो मारे गए आतंकवादियों के बच्चों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया जा सकता।"

मारे गए आतंकवादियों के 1,441 बच्चों को मदद पहुंचाने के साथ उनके 200 वृद्ध अभिभावकों को भी इस योजना में शामिल किया गया था।

इटू ने कहा, "हम इन योजनाओं पर 1.3 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं।"

उन्होंने कहा, "इस योजना में आतंकवादियों की विधवाओं को शामिल नहीं किया गया है यद्यपि हम आतंकवाद प्रभावितों की विधवाओं को मदद दे रहे हैं लेकिन मुझे निजी तौर पर ऐसा लगता है कि आतंकवादियों की विधवाओं को भी जीविका के लिए कुछ मदद देना चाहिए।"

इटू के पास अपने सुझाव के पीछे तर्क भी हैं।

वह कहती हैं, "ज्यादातर लड़कियों का आतंकवादियों से जबरदस्ती विवाह कर दिया जाता है। इसलिए वे उन स्थितियों को क्यों भुगतें जिनके लिए वे खुद जिम्मेदार नहीं हैं।"

समाज कल्याण विभाग के एक अनुमान के मुताबिक आतंकवादी घटनाओं के चलते राज्य में करीब 10,000 महिलाएं विधवा हो गई हैं, इनमें 2,500 आतंकवादियों की पत्नियां हैं जबकि करीब 30,000 बच्चे अनाथ हो गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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