अल्जाइमर मरीज के साथी में मानसिक बीमारी का खतरा
शोधकर्ताओं के मुताबिक अल्जाइमर या अन्य प्रकार के मनोरोगों से पीड़ित अपने प्रिय साथी की देखभाल के शारीरिक व मानसिक तनाव का आपके मस्तिष्क के याददाश्त केंद्र पर खतरनाक असर हो सकता है।
यद्यपि हर तरह से देखभाल करना बहुत मुश्किल है लेकिन साथी की मानसिक हालत में लगातार होती गड़बड़ी को देखना मुश्किल होता है। शोधकर्ता कहते हैं कि पुरुष साथियों पर इसका ज्यादा असर दिखता है।
उटाह स्टेट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 1,200 से अधिक जोड़ों का 12 साल तक अध्ययन किया। इन जोड़ों का विवाह हुए औसतन 49 वर्ष बीत चुके थे।
अध्ययन की शुरुआत में किसी में भी मानसिक बीमारी नहीं थी लेकिन अंत तक 225 लोगों में इसके लक्षण दिखाई दिए। इनमें से 125 पतियों में, 70 पत्नियों में मानसिक विकार देखे गए लेकिन 30 जोड़ों में पति-पत्नी दोनों को मानसिक बीमारी हुई।
अध्ययन में पाया गया है कि पत्नियों की अपेक्षा पतियों में मानसिक बीमारी होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।
शोधकर्ताओं का विश्वास है कि इसके लिए प्रिय लोगों की मानसिक स्थिति खराब होते देखने में होने वाला भावनात्मक दबाव कम जिम्मेदार होता है। उम्र के आखिरी दिनों में पागलपन बढ़ने का मतलब है कि बुजुर्ग होते साथियों में मनोवैज्ञानिक दबाव अधिक होता है।
वेबसाइट 'डेली मेल डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक 'अल्जाइमर्स रिसर्च ट्रस्ट' की रिबेका वुड कहती हैं, "यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अध्ययन में शामिल ज्यादातर प्रतिभागियों के साथी में मानसिक विकार होने के बावजूद उनमें पागलपन के लक्षण नहीं दिखे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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