अजमेर शरीफ विस्फोट : तीसरा संदिग्ध हिरासत में लिया गया (लीड-1)
राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस)ने शनिवार रात मध्यप्रदेश के शाजापुर से विष्णु प्रसाद नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। उसे पूछताछ के लिए जयपुर लाया गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रसाद को आतंकवादी हमलों में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड खरीदने में भूमिका के लिए हिरासत में लिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि विष्णु का इसी मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए दक्षिणपंथी हिंदू संगठन के सदस्य चंद्रशेखर के साथ कथित तौर पर संबंध था।
चंद्रशेखर की गिरफ्तारी अजमेर से बुधवार को देवेंद्र गुप्ता नाम के शख्स की गिरफ्तारी के बाद हुई। इस बीच एटीएस ने शनिवार को अजमेर के मुख्य न्यायिक मेजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दाखिल कर गुप्ता का नार्को परीक्षण कराने की इजाजत मांगी।
अजमेर के मुख्य न्यायिक मेजिस्ट्रेट ने चंद्रशेखर को 12 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। वह उस गुट का अहम सदस्य समझा जाता है जिसने दरगाह में बम विस्फोट कराया। एटीएस ने विस्फोट में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है।
इस मामले में गिरफ्तार किया गया पहला आरोपी गुप्ता झारखंड में रहता है और अजमेर में अपनी बीमार मां से मिलने के लिए आया था। शुक्रवार को अजमेर के मुख्य न्यायिक मेजिस्ट्रेट ने उसे 12 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि गुप्ता से मिली जानकारियों से मामले में ताजा सुराग हाथ लगे हैं और मुख्य आरोपी गुजरात का हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार एटीएस ने मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए गुजरात में दल भेजा है। एटीएस के एक अधिकारी ने बताया, "देवेंद्र गुप्ता से पूछताछ के बाद हमें पक्का यकीन है कि विस्फोटों का मुख्य आरोपी गुजरात में रहता है। गुप्ता ने उसका नाम तक बता दिया है।"
अधिकारी ने बताया कि विस्फोट के बाद घटनास्थल से बरामद सिम कार्ड्स की मदद से पुलिस आरोपियों का पता लगा सकी। गुप्ता ने कथित तौर पर बम विस्फोट के लिए मोबाइल फोन और सिम कार्ड खरीदा था।
गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2007 को ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए इस विस्फोट में तीन व्यक्ति मारे गए थे और 30 घायल हो गए थे। दरगाह में जियारत के लिए देश-विदेश से हजारों जायरीन आते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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