मद्रास उच्च न्यायालय परिसर में पत्रकारों पर हमला
समस्या उस समय शुरू हुई, जब वकीलों के एक समूह ने मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि को काला झंडा दिखाया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। वकील पिछले वर्ष अदालत परिसर में हुए संघर्ष के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
वकीलों के एक अन्य समूह ने विरोधरत वकीलों को रोकने की कोशिश की। ऐसे में दोनों समूहों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। घटना स्थल पर उपस्थित निजी समाचार चैनलों के प्रतिनिधियों ने इस टकराव को कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप संघर्षरत वकीलों ने इन मीडियाकर्मियों पर हमला बोल दिया।
मद्रास युनियन ऑफ जर्नलिस्ट (एमयूजे) ने रविवार को संवाददाताओं पर हुए इस हमले की निंदा की है।
एमयूजे के महासचिव डी.सुरेश कुमार ने कहा, "यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है कि मीडियाकर्मियों पर हमला तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि, देश के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन और कई सारे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।"
सुरेश कुमार ने कहा, "अधिक आश्चर्य की बात यह भी है कि घटना स्थल पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने हमले को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications