परमाणु क्षतिपूर्ति विधेयक को लेकर अंतर्राष्ट्रीय दबाव नहीं : सरकार

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार ने गुरुवार को इस बात से इंकार किया कि नागरिक परमाणु क्षतिपूर्ति विधेयक को अमेरिका के दबाव में पेश किया गया था और कहा कि विधेयक पर वर्ष 1998 से ही विचार किया जा रहा था और वर्ष 2008 में हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्यसभा में कहा, "मैं अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आरोपों से इंकार करता हूं। विधेयक का भारत-अमेरिका परमाणु समझौते से कुछ भी लेना-देना नहीं है।"

चव्हाण ने कहा कि सरकार इसलिए विधेयक को लाना चाहती है क्योंकि वह स्वच्छ ऊर्जा और बिजली के लिए परमाणु संयंत्रों की स्थापना के प्रति गंभीर है।

'सिविल लाइबिल्टी फॉर न्यूक्लियर बिल,2010' को अभी संसद में पेश किया जाना है लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण इसे सार्वजनिक किया गया है।

विधेयक को 15 मार्च को लोकसभा में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया था लेकिन भारतीय जनता पार्टी और वामदलों के दबाव में इसे टाल दिया गया। इसके बाद से सरकार विधेयक पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि विधेयक में किसी भी परमाणु दुर्घटना के शिकारों को सीमित हर्जाने का ही प्रावधान है।

मंत्री ने कहा कि इस विधेयक से शीघ्र और तत्काल मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा। यदि पीड़ितों को और अधिक मुआवजा चाहिए तो वे इसके लिए न्यायालय का सहारा ले सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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