न्याय प्रक्रिया सस्ती और सुलभ हो : राष्ट्रपति
पूर्वोत्तर क्षेत्र में न्याय और सामाजिक-आर्थिक विकासात्मक कार्यक्रमों तक पहुंच विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में राष्ट्रपति ने कहा, "मुकदमेबाजी की प्रक्रिया बहुत खर्चीली हो गई है। गरीबों और वंचित वर्ग के लोगों का बगैर कानूनी सहायता के अदालतों में जाना संभव नहीं है। हमें ध्यान देना होगा कि न्याय प्रक्रिया को ऐसे लोगों के लिए कैसे सुलभ और सस्ती बनाई जाए। मसलन अदालत और वकीलों की शुल्क अदायगी में उन्हें कैसे राहत मिले।"
उन्होंने कहा, "न्याय मिलने के समान अवसरों में कमी से समाज में बिखराव पैदा हो सकता है।"
विभिन्न अदालातें में लंबित पड़े मामलों की संख्या पर चिंता जताते हुए राष्टपति ने कहा, "न्यायपािलका में विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़े मामले हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। इससे न्यायपालिका के प्रति लोगों की उम्मीदों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।"
"उचित समय पर न्याय मिलना ही न्याय प्रकिया का सबसे बड़ा सिद्धांत है।"
राष्ट्रपति ने कहा, "अदालतों की दक्षता सुधारने के लिए सूचना और संचार तकनीकों के इस्तेमाल के प्रयास होने चाहिए। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकेगी।"
भविष्य में न्यायपालिका की भूमिका समग्र हो, इसके लिए उन्होंने कानूनी बिरादरी से आगे आने का आह्वान किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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