छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का खूनी खेल : 73 सुरक्षाकर्मी शहीद (लीड-6)

केरिपु के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिल्ली में कहा, "हमले में मरने वालों की संख्या 75 है, जिसमें से 74 केरिपु के जवान हैं और एक राज्य पुलिस से संबंधित है। हमले में सात अन्य घायल भी हो गए हैं।"

अधिकारी ने कहा, "केरिपु की 62वीं बटालियन के सुरक्षा कर्मी नियमित गश्त पर थे। उसी दौरान वे नक्सलियों के हमले की चपेट में आ गए।"

अधिकारी ने यह बताने से इंकार कर दिया कि हमले के बाद कितने सुरक्षा कर्मी लापता हैं। लापता सैनिकों की संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि एक कंपनी में आमतौर पर 100 से 120 जवान होते हैं।

इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गृह मंत्री पी.चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और तीन रक्षा प्रमुखों की एक बैठक बुलाई है। यद्यपि अधिकारियों ने इसे एक पूर्व निर्धारित बैठक बताया है, लेकिन नक्सली हमला बैठक का शीर्ष एजेंडा हो सकता है।

हमला करने वाले नक्सलियों की संख्या 700 से अधिक बताई गई है।

पुलिस के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के चिंतलनार इलाके में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाकर कई विस्फोट किए और फिर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 73 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए।

चिदंबरम ने नक्सली हमले को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की वहशी प्रवृत्ति और क्रूरता का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि नक्सली किस हद तक हिंसा पर उतारू हो सकते हैं।

चिदंबरम ने कहा, "कोई बड़ी चूक हो गई। जवान नक्सलियों द्वारा बिछाए जाल में फंस गए। मैं स्तब्ध हूं।"

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने हमले को कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की है।

सिंह ने कहा, "हमें अपनी नीति की समीक्षा रोज करनी होगी। हमें बेहतर समन्वय की जरूरत है। "

उधर, राज्य के गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने कहा कि खुफिया विफलता की वजह से नक्सली हमला हुआ।

दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा ने कहा कि नक्सली हमले में शहीद 72 सुरक्षाकर्मी सीआरपीएफ के 62वीं बटालियन के थे जबकि एक राज्य पुलिस का अधिकारी था।

पुलिस महानिदेशक विश्व रंजन ने आईएएनएस से कहा कि बड़ी संख्या में सशस्त्र नक्सलियों ने सीआरपीएफ दल पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि यह हमला सुनियोजित प्रतीत होता है।

पुलिस सूत्रों ने कहा है कि कई सुरक्षा कर्मियों के लापता होने की खबर है। वायु सेना के दो हेलीकाप्टर जंगलों में लापता सुरक्षा कर्मियों की तलाश कर रहे हैं। नक्सली सुरक्षा कर्मियों के हथियार भी उठा ले गए हैं।

सीआरपीएफ के महानिदेशक विक्रम श्रीवास्तव, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य में हालात की समीक्षा कर रहे हैं। वायु सेना से लड़ाकू एमआई-17 हेलीकाप्टर और परिवहन विमान एएन-32 को तैयार रखने के लिए कहा गया है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के हेलीकाप्टरों को तलाशी और बचाव अभियान में लगाया गया है।

घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए बस्तर क्षेत्र के जगदलपुर से एक हेलीकॉप्टर भेजा गया है। इसके अलावा राज्य पुलिस बल के एक दस्ते को भी मौके पर रवाना कर दिया गया है।

पंजाब के पूर्व पुलिस प्रमुख के.पी.एस.गिल ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नक्सलियों के खिलाफ राज्य सरकार की नीति को गलत करार दिया। उन्होंने एक निजी समाचार चैनल से कहा कि राज्य सरकार की नीति दोषपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ में यह अब तक का सबसे बड़ा नक्सली हमला है। इससे पहले वर्ष 2007 में बीजापुर जिले में हुए नक्सली हमले में 55 पुलिसकर्मी मारे गए थे।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर और दंतेवाड़ा जिला शामिल है। इन जिलों में नक्सली सबसे अधिक सक्रिय है। यहां नक्सली हमले में वर्ष 2005 से अब तक 16,00 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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