अवकाश प्राप्त न्यायाधीश ने लगाई न्याय की गुहार
पूर्व न्यायाधीश विजय शिंदे ने गुजरात उच्च न्यायालय प्रशासन के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें एक विभागीय जांच के आधार पर उनकी पेंशन रोक दी गई है। जांच में शिंदे पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और घोर दुराचरण का आरोप लगाया गया।
अदालत के रिकार्ड के मुताबिक शिंदे के खिलाफ जांच एक अज्ञात पत्र के आधार पर शुरू की गई।
राज्य के विभिन्न जगहों पर अपनी सेवा दे चुके शिंदे के खिलाफ जांच बैठाने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के कुछ न्यायाधीश मामले को अन्य न्यायाधीशों के पास स्थानांतरित कर रहे हैं।
यह मामला एक फरवरी 2010 को ए. एल. दवे और एच. एन. देवानी की खंडपीठ के समक्ष आया, जहां न्यायाधीशों ने आदेश दिया, "इस याचिका को इस खंडपीठ के समक्ष विचार के लिए स्वीकार किया, जिसमें हममें से एक (दवे) पक्ष नहीं है।"
इसके बाद मामला आर. आर. त्रिपाठी और जे. सी. उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष आया। इस खंडपीठ ने भी ऐसा ही आदेश दिया।
इसके बाद यह मामला मुख्य न्यायाधीश जे. सी. मुखोपाध्या की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष पहुंचा।
इसकी गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ मामले को एक उपयुक्त खंडपीठ के हवाले करना चाहता है। मामले की सुनवाई 12 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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