कार्बन उत्सर्जन से महासागरों में खतरनाक बदलाव
अंतर्राष्ट्रीय समुद्र वैज्ञानिकों ने बताया कि ईंधन, सीमेंट उत्पादन, जगलों की अंधाधुंध कटाई और अन्य मानवीय गतिविधियों की वजह से पैदा हुआ 30 फीसदी से ज्यादा सीओ2 महासागरों में सीधे चला जाता है, जो उसके पानी को धीरे-धीरे अम्लीय बना देता है।
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया, "महासागरों की हालत करोड़ों वर्ष पहले की तुलना में उसकी बनावट और पारिस्थितिकी प्रणाली अधिक खतरनाक हो गई है। हमें जल्दी ही सीओ2 उत्सर्जन कम करने के लिए कोई नई नीति बनाने की जरूरत है।"
वैज्ञानिकों ने महासागरों में बढ़ रहे अम्लीकरण को ग्लोबल वार्मिग का एक प्रमुख कारण बताया। इसके प्रमुख कारणों में मानवीय क्रियाओं से कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जित होने और मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के जलने से ये महासागरों में घुल जाते हैं। यह क्रिया स्वतंत्र तौर पर ही होती है, लेकिन इससे धरती का तापमान बढ़ता है।
'आस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कोरल रीफ स्टडीज' के प्रोफेसर आवे होयग गुलबर्ग ने बताया, "वैज्ञानिकों के द्वारा पूरी दुनिया से जुटाए गए नमूनों से पता चलता है कि समुद्रों का अम्लीकरण बढ़ रहा है। इससे पूरी मानवता और पृथ्वी को खतरा है।"
उन्होंने बताया कि बढ़ रहा अम्लीकरण महासागरों को कई तरह से नुकसान पहुंचा रहा है। मसलन समुद्री जीवों, उसके अंदर मौजूद पेड़-पौधों को भी इससे हानि हो रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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