पाक में राष्ट्रपति की ताकत कम होगी

संसद के निचले सदन नेशनल एसेंबली में 18वें संवैधानिक विधेयक को पेश करते हुए प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा, "आज एक ऐतिहासिक दिन है। आज हम अतीत की गलतियों को सुधारने के लिए इकट्ठा हुए हैं।"

संविधान में किए जाने वाले संशोधन के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह को मानने के लिए बाध्य होंगे। विधेयक के पारित होने के बाद सेना प्रमुख और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नियुक्त करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने 17वें संविधान संशोधन के जरिए सेनाध्यक्ष और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति संबंधी अधिकार अपने हाथों में ले लिया था।

एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान ने गिलानी के हवाले से कहा, "मैं संसदीय समिति और राजनीतिक दलों के उन प्रयासों की तारीफ करता हूं, जो उस तानाशाह के कार्यो को खत्म करना चाहते हैं, जिसने संविधान को कुचल दिया था। "

संसद की एक संवैधानिक समिति राष्ट्रपति के कुछ महत्वपूर्ण अधिकार को खत्म करने पर काम कर रही थी। समिति के सभी सदस्यों ने संविधान के 18वें संशोधन के मसौदे को तैयार कर उसपर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

संशोधन में राष्ट्रपति के अधिकार घटाने, पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत का नाम खैबर पखतूनख्वा रखने और जजों की नियुक्ति के लिए बने आयोग के सदस्यों में बढोतरी जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संसद की संवैधानिक समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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