हर वर्ष 10 उपग्रहों के प्रक्षेपण की भारत की योजना
बेंगलुरू, 31 मार्च (आईएएनएस)। संचार और रिमोट सेंसिंग जैसे विभिन्न कार्यो के लिए उपग्रहों की बढ़ती मांग को देखते हुए देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने हर वर्ष औसतन 10 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के.राधाकृष्णन ने आईएएनएस से कहा, "हम वित्तीय वर्ष 2010 की शुरुआत से हर वर्ष 10 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की योजना बना रहे हैं। उपग्रहों की श्रृंखला और प्रक्षेपण वाहनों की हमारी तैयारी विभिन्न चरणों में है।"
इसरो ने वित्तीय वर्ष 2009-10 में पांच उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। इनमें इजरायल के सहयोग से ओशनसेट-2, रीसेट-2 और एक छोटा उपग्रह अनुसेट प्रक्षेपित किया। ओशनसेट-2 के साथ अन्य देशों के छह छोटे उपग्रहों को भी प्रक्षेपित किया गया।
दो उपग्रहों-जीसेट-4 और काटरेसेट-2बी के प्रक्षेपण में अज्ञात कारणों से विलंब हो रहा है। इनमें से एक कारण जीएसएलवी-डी3 रॉकेट में पहली बार उपयोग किए जाने वाले क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण में होने वाले देरी है।
राधाकृष्णन ने कहा, "संचार और रिमोट सेंसिंग के लिए उपग्रहों के प्रक्षेपण पर हमने अपनी समीक्षा बैठक की है। हम अप्रैल में एक उपग्रह का और मई में दूसरे का प्रक्षेपण करने वाले हैं। हमारा लक्ष्य मध्य अप्रैल तक जीसेट-4 को प्रक्षेपित करना है और हम इस दिशा में काम कर रहे हैं।"
अंतरिक्ष एजेंसी ने 15-19 अप्रैल के बीच आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 2.2 टन के जीसेट-4 को जीएसएलवी-डी3 रॉकेट से प्रक्षेपित करने की तैयारी शुरू की है।
इसरो अध्यक्ष ने कहा, "मई के शुरू में हमारी योजना पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी-सी15) रॉकेट से अल्जीरिया के एक उपग्रह काटरेसेट-2बी और दो छोटे उपग्रहों-कनाडा के यूथस्टार और कर्नाटक के कॉलेज छात्रों द्वारा निर्मित स्टूडसेट को अंतरिक्ष में भेजने की है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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