अपनी तरह की पहली शल्य चिकित्सा से मिला नया जीवन
मुंबई, 31 मार्च (आईएएनएस)। अपने तरह की बेहद दुर्लभ दिल की बीमारी से ग्रसित मुंबई के दीपेश शाह का डॉक्टरों की एक टीम ने सफल ऑपरेशन किया है। शाह के दिल में स्थाई संक्रमण विकसित होने का खतरा था लेकिन देश में अपनी तरह की पहली शल्य चिकित्सा द्वारा 39 वर्षीय शाह के दिल के वाल्व को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया गया।
शाह के दिल में महाधमनी वाल्व (कपाट) से रक्त का अत्यधिक रिसाव हो रहा था लेकिन रमाकांत पांडा के नेतृत्व में चिकित्सकों के एक दल ने उनकी सफल शल्यक्रिया कर दी है।
पांडा दिल की बीमारी के इस मामले को बेहद दुर्लभ बताते हैं। भारत में पहली बार यह अनूठे प्रकार की शल्यक्रिया हुई है। 'एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट' (एएचआई) में यह शल्यक्रिया हुई थी।
शाह को पूर्व में दिल की बीमारी की कोई शिकायत नहीं थी। वह जनवरी में एक नियमित चिकित्सा जांच के लिए एएचआई गए थे। उनकी सभी जांचों की रिपोर्ट सामान्य थी लेकिन उनकी महाधमनी के वाल्व में रिसाव देखा गया।
शाह ने आईएएनएस को बताया कि वाल्व दिल में और दिल से बाहर रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है। महाधमनी वाल्व में खराबी आ जाने के कारण यह रिसाव हो रहा था और परिणामस्वरूप महाधमनी में रक्त पीछे की ओर बह रहा था।
अंतत: 12 मार्च को उनकी शल्य चिकित्सा हुई। यह शल्यक्रिया 12 घंटे तक चली।
पांडा ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की शल्य चिकित्सा की थी।
उन्होंने बताया, "आमतौर पर जब वाल्व खराब हो जाता है तो उसकी जगह पर नया यांत्रिक या जैविक वाल्व लगाया जाता है। यद्यपि इस मामले में पुराने वाल्व की ही मरम्मत की गई है।"
पांडा ने कहा कि शल्यचिकित्सा सफल रही और मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने पर एक सप्ताह बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
उन्होंने बताया कि जब मरीज को दूसरा वाल्व लगाया जाता है तो शरीर में उसके प्रति प्रतिरोधकता पैदा होती है और स्थाई संक्रमण की संभावना रहती है लेकिन शाह में पुराने ही वाल्व की मरम्मत की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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