डॉल्फिनों के लिए खतरनाक है गंगा के पानी में घुले कीटनाशक
डॉल्फिनों की वर्तमान संख्या का आधा हिस्सा बिहार में और आधा उत्तर प्रदेश में है।
गंगा नदी में मिलने वाली डॉल्फिनों के एक विशेषज्ञ व पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर. के. सिन्हा ने आईएएनएस को बताया कि कृषि भूमि में कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग डॉल्फिनों के अस्तित्व के लिए खतरा है क्योंकि डॉल्फिनों के शरीर की चयापचय क्षमता बहुत कम होती है।
पिछले दो दशकों से शुद्ध जल में रहने वाली डॉल्फिनों पर शोध कर रहे सिन्हा कहते हैं कि नदियां कीटनाशकों का प्रमुख संग्रह स्थल बन गई हैं। वह कहते हैं, "कृषि भूमि, घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थो के माध्यम से कीटनाशकों के विषाक्त पदार्थ नदियों में पहुंचते हैं।"
उन्होंने कहा कि नदियों की खाद्य श्रृंखला में डॉल्फिनें सबसे ऊपर आती हैं इसलिए उनकी स्थिति का आकलन कर गंगा नदी की स्वच्छता की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, "यदि नदी में डॉल्फिनों की संख्या बढ़ती है तो यह एक सकारात्मक लक्षण होगा लेकिन यदि इनकी संख्या कम होती है तो यह एक नकारात्मक लक्षण होगा और इसका मतलब है कि नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है।"
विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक वर्तमान में गंगा नदी में डॉल्फिनों की संख्या 2,000 है। 'वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर' (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) का कहना है कि 80 के दशक में डेल्टा क्षेत्र में ही करीब 3,500 डॉल्फिनें थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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