वोल्वो चीन के पास

वोल्वो चीन के पास

चीन की कार कंपनी जीली ने अमरीकी कंपनी फ़ोर्ड से वोल्वो ब्रांड ख़रीदने के लिए एक समझौता किया है.

सौदा लगभग दो अरब डॉलर में तय हुआ है और ये किसी चीनी कार कंपनी का किसी दूसरी कंपनी को ख़रीदने के लिए हुआ अभी तक का सबसे बड़ा समझौता है.

वोल्वो स्वीडन की गाड़ी है जिसे फ़ोर्ड ने ख़रीदा था मगर मंदी आने के बाद से फ़ोर्ड अपने कई ब्रांडों को बेचने की कोशिश कर रही थी जिनमें वोल्वो भी शामिल था.

समझौता ऐसे समय हुआ है जब चीनी उपराष्ट्रपति ज़ी जिनपिंग स्वीडन का दौरा कर रहे हैं.

समझा जा रहा है कि इस सौदे के बाद फ़ोर्ड अपने कर्ज़ों का भुगतान कर सकेगा और अपने मुख्य ब्रांडों पर ध्यान दे सकेगा.

फ़ोर्ड इससे पहले अपने दो प्रमुख ब्रांड - जगुआर और लैंड रोवर - भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स को बेच चुका है.

विश्लेषकों का मानना है कि ये सौदा वोल्वो के लिए भी फ़ायदेमंद रहेगा जिससे कि उसे चीन में बढ़ते बाज़ार में पैठ बनाने का अवसर मिल सकेगा.

वोल्वो वर्ष 2005 के बाद से कभी भी लाभ नहीं कमा सका है.

चीन में पिछले साल एक करोड़ 36 लाख गाड़ियाँ बिकीं जिससे चीन अमरीका को पीछे छोड़ कार का सबसे बड़ा बाज़ार बन गया.

जीली चीन की सबसे बड़ी कार कंपनी है जो चीन में हर साल चार लाख गाड़ियाँ बेचती है.

मगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उसकी पहुँच सीमित है और समझा जा रहा है कि वोल्वो की ख़रीद के बाद यूरोपीय बाज़ार में उसकी पहुँच बन सकेगी.

वैसे जीली वोल्वो का मुख्यालय और उसके शोध आदि के केंद्रों को स्वीडन में ही बनाए रखना चाहती है.

मगर वोल्वो का कुछ काम चीन भी स्थानांतरित किया जाएगा और वहाँ चीनी उपभोक्ताओं का भी ध्यान रखा जाएगा.

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