सत्येन्द्र दुबे के कातिलों को मिली उम्रकैद
त्वरित अदालत के न्यायाधीश राघवेन्द्र कुमार सिंह ने शनिवार को तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पिछली सुनवाई में पिंकु रविदास, मंटु कुमार तथा उदय कुमार को दोषी करार दिया था। सजा सुनाए जाने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता नागेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ वह उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में गया स्थित सर्किट हाउस के निकट सत्येन्द्र दुबे की हत्या कर दी गई थी। एनएचएआई में कार्यरत 31 वर्षीय दुबे ने आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग किया था। वह स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना पर काम कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखकर वहां होने वाले भ्रष्टाचार और घटिया दर्जे के निर्माण कार्य की शिकायत की थी।
यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को 11 नवंबर 2002 को मिला था और दुबे की अपील के बावजूद यह पत्र सार्वजनिक हो गया। इसके बाद दुबे की हत्या कर दी गई थी। इस मामले की एक प्राथमिकी गया जिले के रामपुर थाने में दर्ज की गई थी। बिहार सरकार के अनुरोध पर आठ दिसंबर 2003 को यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।













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