नई बस्तियों पर रोक की माँग

मध्यपूर्व शांति वार्ताओं से जुड़े चारपक्षीय समूह या क़्वार्टेट ने इसराइल से नई यहूदी बस्तियाँ बसाने से जुड़ी सारी गतिविधियों पर रोक लगाने की माँग की है.
समूह की मॉस्को में हुई बैठक के बाद संयुक्तराष्ट्र के महासचिव बान की मून ने पत्रकारों की इस बात की जानकारी दी.
मून ने पूर्वी येरुशलम में नई बस्तियाँ बसाने की इसराइल की योजना की निंदा भी की.
उल्लेखनीय है कि मध्यपूर्व पर चारपक्षीय समूह में संयुक्तराष्ट्र, अमरीका, यूरोपीय संघ और रूस शामिल हैं.
मॉस्को में चारों पक्षों की बैठक के बाद बान की मून ने कहा, "क़्वार्टेट इसराइल की सरकार से बस्तियाँ बसाने से जुड़ी सभी गतिविधियों पर रोक लगाने की अपील करता है. इनमें बस्तियों का विस्तार भी शामिल है."
क़्वार्टेट ने इसराइल से मार्च 2001 के बाद बनाई गई सुरक्षा चौकियों को बंद करने, और पूर्वी येरुशलम में निर्माण कार्य शुरू नहीं करने की अपील भी की है.
मून ने मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़, अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कैथरिन एशटन के साथ विचार-विमर्श किया.
पूर्वी येरुशलम में 1600 नए घर बनाने की इसराइल की योजना पर चारों पक्षों ने बहुत ही कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. बान की मून ने इस बारे में बताया, "चूंकि पूर्वी येरुशलम पर इसराइली नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय समुदाय मान्यता नहीं देता है, इसलिए क़्वार्टेट ने येरुशलम के मामले में बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने पर ज़ोर दिया है, और पूर्वी येरुशलम में नए घर बनाने की इसराइल सरकार की घोषणा की निंदा की है."
मून ने कहा कि शांति प्रक्रिया से जुड़े पक्षों का लक्ष्य है दो वर्षों के भीतर इसराइल-फ़लस्तीनी शांति समझौते को संभव बनाना जिसमें अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र की भी व्यवस्था हो.
मुख्य फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एरेकात ने चारपक्षीय समूह के बयान का स्वागत किया है.
विश्लेषकों के अनुसार इसराइल पर अब इस बात का दबाव बन गया है कि वह फ़लस्तीनियों को वार्ता की मेज़ पर लाने के लिए कोई आकर्षक प्रस्वात सामने रखे.












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