राजस्थान विधानसभा में हाथापाई, 4 सदस्य घायल

जयपुर, 19 मार्च (आईएएनएस)। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को एक काला अध्याय जुड़ गया। भाजपा विधायक राजेन्द्र राठौड़ के एक साल के निलंबन के बाद सदन से बाहर निकालने की कार्रवाई को नाकाम करने के लिए बेमियादी धरने पर बैठे विपक्षी भाजपा विधायकों की मार्शलों के साथ हाथापाई हुई जिसमें चार विधायक घायल हो गए जिन्हें बाद में एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विधानसभा में भारी हंगामे और जोर आजमाईश के शर्मनाक माहौल में सदन की कार्यवाही पहले एक घंटे के लिए स्थगित कर दी गई लेकिन बाद में सदन को विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

सदन में शुक्रवार को हुई घटना और दो विधायकों के निलंबन को वापस लेने तक भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवारी 11 अन्य विधायकों के साथ सदन में आमरण अनशन पर बैठ गए। विधानसभा अध्यक्ष ने तिवारी के फैसले को कठोर निर्णय बताते हुए उस पर फिर से विचार करने की अपील की।

शुक्रवार को प्रश्नकाल की शुरुआत से पहले अध्यक्ष ने कहा कि बहुमत के निर्णय के आधार पर राठौड़ को एक साल के लिए सदन से निलंबित किया गया है इसलिए वह अजनबी के रूप में हैं। सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्हें बाहर जाने का निर्देश देते हुए अध्यक्ष ने भाजपा उपनेता से भी इसमें सहयोग देने का अनुरोध किया।

अध्यक्ष ने बार-बार कहा कि सदन के निर्णय का पालन कराने हेतु उन्हें मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ेगी। उनके निर्देश पर मार्शल राठौड़ को सदन से बाहर ले जाने की मशक्कत में जुट गए। विपक्षी सदस्यों और सुरक्षा प्रहरियों की जोरआजमाइश में भाजपा के गुलाबचंद कटारिया, बहादुरसिंह कोली और वासुदेव देवनानी बेहाश हो गए।

उधर, संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने तीन दिन से जारी गतिरोध के लिए विपक्षी दल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि दरअसल भाजपा में विधायक दल के नेता और प्रदेशाध्यक्ष के पदों को लेकर गुटबाजी और विवाद बना हुआ है उस पर पर्दा डालने के लिए विधायक सदन में गैर वाजिब तरीके से सरकार पर आरोप लगाकर खुद की एकता का नाटक कर रहे हैं।

बाद में पत्रकारों से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि विधानसभा में तीन दिन से जारी गतिरोध को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। भाजपा विधायक दल के उप नेता घनश्याम तिवारी का आमरण अनशन करना एक कठोर निर्णय है, जिस पर उन्हें फिर से विचार करना चाहिए।

दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने राज्य सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। एक बयान में उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह का रुख अपना कर विपक्ष का गला दबाना चाहती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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