स्तन कैंसर के इलाज में कारगर हो सकती है 'आइस बॉल थेरेपी'
खास बात यह है कि इस तकनीक में किसी प्रकार की शल्य क्रिया की जरूरत नहीं होती। एक नए शोध के माध्यम से यह बात सामने आई है।
इस तकनीक को चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'क्रायोथेरेपी' कहा जाता है। इसका उपयोग काफी समय पहले से प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए किया जाता रहा है।
इस तकनीक में स्तन के भीतर महीन सुइयों के जरिए छेद करके स्तन कैंसर के ट्यूमरों में बेहद ठंडी गैसों का रिसाव किया जाता है।
'आइस बॉल थेरेपी' की खास बात यह है कि यह कैंसर को बढ़ाने वाले कारकों को मार देती है। स्तन कैंसर के इलाज के लिए 'फ्रीजिंग' तकनीक का पहले भी इस्तेमाल किया जाता रहा है लेकिन यह पहला मौका है जब बिना किसी सर्जरी के स्तन कैंसर का इलाज संभव होता दिख रहा है।
कैंसर विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तकनीक के आम लोगों तक पहुंचने में हालांकि काफी वक्त लग जाएगा। अब तक ट्यूमर वाले स्तनों का काटकर निकाल देने, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के जरिए इसका इलाज होता रहा है लेकिन इन सबका मरीज की मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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