परमाणु जवाबदेही विधेयक पर चर्चा का सरकार का प्रस्ताव (लीड-1)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने यहां संवाददाताओं से कहा, "मैं समझता हूं कि कुछ राजनीतिक पार्टियों द्वारा बहुत डर पैदा किया जा रहा है, खासतौर से हमारे वामपंथी मित्रों द्वारा। जब भी किसी विदेशी भागीदारी का मुद्दा आता है, वामपंथी लाल झंडा उठा लेते हैं।"

चव्हाण ने संवाददाताओं से कहा, "मैं समझता हूं कि इन मुद्दों पर संसद में या स्थायी समिति में या फिर निजी बैठक में शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत की जा सकती है।"

ज्ञात हो कि प्रस्तावित परमाणु जवाबदेही विधेयक में संयंत्र संचालकों की जवादेही 500 करोड़ रुपये निर्धारित किए जाने का प्रावधान है।

चव्हाण ने कहा, "मुआवजे की सीमा निर्धारित किए जाने का विरोध राजनीतिक है, तो फिर यह अलग बात हो जाती है।"

चव्हाण ने हालांकि साफ किया कि परमाणु ऊर्जा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एडीआई) या घरेलू निजी कंपनियों को भागीदारी की अनुमति देने की कोई योजना नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र अति संवेदनशील है।

चव्हाण ने एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के एक कार्यक्रम में कहा, "परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में एफडीआई या घरेलू निजी कंपनियों को अनुमति देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हमारी पहली चुनौती असैन्य परमाणु जवाबदेही विधेयक को आम सहमति से पारित करवाने का है।"

उन्होंने कहा कि विधेयक के पारित हो जाने के बाद सरकार घरेलू विद्युत कंपनियों और विदेशी विद्युत कंपनियों के बीच समझौते की शर्ते तय करने में सक्षम हो जाएगी।

चव्हाण ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के पास देश में परमाणु बिजली उत्पादन कार्यक्रम के विस्तार के लिए फ्रांस, रूस और अमेरिका जैसे देशों से उपकरण आयात करने की महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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