उच्च प्रौद्योगिकी कंपनियों से प्रतिबंध हटवाना चाहता है भारत
वाशिंगटन, 16 मार्च (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के क्रियान्वयन को दोनों देशों के लिए लाभदायक बताते हुए भारत उच्च तकनीकी कंपनियों को प्रतिबंधित सूची से बाहर निकलवाना चाहता है।
विदेश सचिव निरुपमा राव ने सोमवार को भारत-अमेरिका उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह (एचटीसीजी) के आरंभिक सत्र में कहा, "एक बार 123 समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के उद्योगों के बीच पारस्परिक आदान प्रदान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।"
राव ने कहा कि भारत, अमेरिका द्विपक्षीय निवेश संधि पर अभी चर्चा हो रही है और भारत की रक्षा खरीद कार्यक्रम से भी नए अवसर उपलब्ध होंगे।
राव ने अमेरिकी वाणिज्य उप मंत्री डेनिस एफ.हाइटोवर के साथ एचटीसीजी की सातवीं बैठक की सह अध्यक्षता की। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पद संभालने के बाद से यह एचटीसीजी की पहली बैठक है। इसका गठन दोनों देशों के बीच उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापार के विस्तार के लिए नवंबर 2001 में किया गया था।
भारत अमेरिका व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने बैठक के व्यापारिक सत्र का आयोजन किया था। भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से यूएसआईबीसी को रक्षा व्यापार/असैन्य परमाणु सहयोग, बायो-टेक्न ोलॉजी, नैनो-टैक्न ोलॉजी और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए सुझाव देने का काम सौंपा गया है।
निर्यात नीति में सुधार की अमेरिकी घोषणा का स्वागत करते हुए राव ने कहा कि उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत पर लगे प्रतिबंधों पर सरकार के रुख से उन्होंने अमेरिकी वाणिज्य विभाग से अवगत करा दिया।
राव ने कहा, "भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जैसे संस्थान जिसने नासा (अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी) के साथ कई परियोजनाओं का विकास किया, उसे भी प्रतिबंधित सूची में रखना दुर्भाग्यपूर्ण है।"
राव ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के संबंध में तकनीकी सहयोग तथा नई प्रौद्योगिकी को व्यापार के लिए उपलब्ध कराने के क्षेत्र में सहयोग का सुझाव दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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