मेरी रचनात्मकता का बड़ा हिस्सा अभी भी अधूरा : थरूर

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर राजनीति में कदम रखने के बाद से बतौर लेखक पहले की तरह सक्रिय नहीं है। उनका कहना है कि उनमें मौजूद रचनात्मकता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अधूरा है।

थरूर ने आईएएनएस से कहा, "सरकार में शामिल होने के बाद से मैंने कुछ भी नहीं लिखा है। मैं हालांकि ट्विटर और आधिकारिक नोट लिखता रहता हूं।"

उन्होंने कहा, "मैं इन दिनों मुश्किल से पढ़ने के लिए समय निकाल पाता हूं। इस बात का दुख है कि मैंने इन चीजों को पीछे छोड़ दिया है। मेरा रचनात्मक हिस्सा अभी अधूरा है। मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ मेरे अंदर मौजूद लेखक के साथ न्याय कर पाना मुश्किल है।"

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव ने कहा, "यह कोई दुर्घटना नहीं है कि ज्यादातर नेताओं ने किताबें उस समय लिखीं जब वे विपक्ष में थे। मैं ट्विटर पर रोजाना दर्जनों संदेश पाता हूं, जिसमें मेरे प्रशंसक मुझसे पूछते हैं कि मैंने लिखना बंद क्यों कर दिया है या मैं अपनी अगली किताब कब लिखूंगा? "

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर बीते लोकसभा चुनाव में चुने गए थरूर ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि यह एक अस्थायी परिस्थिति है और इसके बाद मैं लेखन पर वापस लौट सकता हूं।"

एक राजनयिक के रूप में ख्याति अर्जित करने वाले थरूर बतौर लेखक भी जाने जाते हैं। उनका लिखा व्यंग्य 'द ग्रेट इंडियन नॉवेल' काफी लोकप्रिय है। यह वर्ष 1989 में आया था और थरूर ने इसमें महाभारत की 20वीं सदी के मुताबिक व्याख्या की थी।

थरूर को अभी भी महाभारत के बारे में बात करना पसंद है। उन्होंने कहा, "इस पुराण में कुछ चीजे हैं जिनको लेकर कुछ और नया किया जाना चाहिए। मसलन, मैं एकलव्य की कहानी पर काम करना चाहूंगा।"

उनका कहना है कि महाभारत का केंद्रबिंदु 'धर्म' है। उन्होंने कहा, "मुझे मेरे एक मुस्लिम मित्र ने धर्म की सबसे अच्छी परिभाषा बताई। उसके मुताबिक धर्म वह है, जिसके द्वारा हमारा अस्तित्व है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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